केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि जजों की नियुक्ति को लेकर कोई अड़चन या रोड़ा नहीं है। सरकार ने बुधवार को अदालत में कहा कि विभिन्न हाईकोर्ट की ओर से ही नियुक्ति की प्रक्रिया देरी से शुरू की गई। इलाहाबाद हाईकोर्ट में बड़ी संख्या में पद खाली हैं, लेकिन वहां नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने में न्यायपालिका को नौ साल का समय लग गया।
हालांकि सरकार ने साफ किया कि वह किसी पर दोषारोपण नहीं कर रही है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कॉलेजियम ने जजों की नियुक्ति से संबंधित नामों को हरी झंडी दे दी हो तो उसके बाद देरी नहीं होनी चाहिए।
जजों की कमी और जजों की नियुक्ति में भारी विलंब को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ से कहा कि सरकार की ओर से कोई अड़चन नहीं है। नियुक्ति संबंधी फाइलों को क्लीयर किया जा रहा है।
अटॉर्नी जनरल ने कहा कि यह एक तरह की दौड़ है। अगर आप वक्त पर दौड़ लगाना शुरू करते हैं तो ही आप समय पर पहुंच पाएंगे। उन्होंने कहा कि विभिन्न हाईकोर्ट की ओर से ही पांच-छह वर्षों से खाली पड़े पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया देरी से शुरू हुई। हालांकि अटॉर्नी जनरल ने कहा कि वह किसी पर आरोप नहीं लगा रहे हैं, लेकिन अगर प्रस्ताव में सालों की देरी हो तो समस्या आ जाती है।