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मंजिलें और भी हैं : कम उम्र में शादी से बचने के लिए पुलिस में भर्ती हुई

Fri, 12 Jul 2019 07:01 AM IST
Avdhesh Kumar मीना घोड़के
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मीना घोड़के - फोटो : अमर उजाला
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मैं महाराष्ट्र के बीड जिले की रहने वाली हूं। यहां के ग्रामीण इलाकों में खेतों में काम कराने के लिए अठारह वर्ष से कम उम्र की दुल्हनों की तलाश रहती है। मैं भी इस जाल में फंसने वाली थी, पर वक्त रहते मैं इससे निकल गई। बीड क्षेत्र में न तो पानी है, न रोजगार। पिछले कई वर्षों से मेरा इलाका सूखे की मार झेल रहा है, जिसके चलते हर किसी की खेती-बाड़ी भगवान भरोसे ही चलती है। मेरे घर की परिस्थिति भी कुछ ठीक नहीं थी। पिता खेतों में काम करते थे, पर आर्थिक रूप से संपन्न नहीं थे। इन्हीं परिस्थितियों के चलते सातवीं क्लास की पढ़ाई के दौरान मेरी बड़ी बहन की शादी कर दी गई। 

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मेरे साथ ही पढ़ाई कर रही कई लड़कियों को शादी और खेतों में काम करने के लिए अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी। इस सब से मैं परेशान थी, लेकिन मन में ठान लिया कि अपनी जिंदगी बड़ी बहन की राह पर नहीं जाने दूंगी। मैं सिर्फ एक घरेलू महिला बनकर नहीं रहना चाहती थी। मैं न तो खेतों में काम करना चाहती थीं, न पढ़ाई बीच में छोड़कर अपना शादी-ब्याह करना चाहती थी। मेरे स्कूल के आधे से ज्यादा दिन खेत में ही गुजरे। 

वहां के अनुभव से एक चीज तो मैंने जान ली थी कि, संसाधनों के अभाव में पैदावार तो हमेशा खराब ही होती है। इससे कहां जीवन बसर होने वाला है। पढ़ाई के दिनों में ही मैंने विचार किया कि आज के समय में महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित नौकरी क्या हो सकती है। तब मुझे समझ में आया कि पुलिस की नौकरी ही सबसे सुरक्षित हो सकती है। इसमें दो फायदे दिखे, एक तो नौकरी मिल जाएगी, दूसरा महिला कांस्टेबल पर किसी को कुदृष्टि डालने की हिम्मत नहीं होगी।
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महाराष्ट्र पुलिस सेवा में महिलाओं को तैंतीस फीसदी आरक्षण का प्रावधान है। ऐसे में यहां बारहवीं पास होने के बाद अट्ठारह साल की उम्र में आराम से पुलिस की वर्दी मिल जाती है। हालात यह हैं कि, जिनकी लड़कियां पुलिस में नौकरी पा जाती हैं, उनके घरवालों की भी इज्जत बढ़ जाती है। इसीलिए यहां के गांवों की लड़कियों के पुलिस में भर्ती होने के पीछे उनका जुनून भी होता है। साथ ही पुलिस की नौकरी में शुरू से ही अच्छा वेतन प्रतिमाह मिलने लगता है, जिससे मां-बाप की जिंदगी भी आसान हो जाती है। मेरे पुलिस सेवा में जाने के पीछे यह सब मुख्य कारण रहे।

बीड की लगभग पचास फीसदी लड़कियों की शादी किशोर उम्र में ही कर दी जाती है। पढ़ाई के दिनो में ही मैंने एक दिन अखबार में पुलिस भर्ती का विज्ञापन देखा। हालांकि तब घरवाले मेरी शादी की योजना बना रहे थे। मैंने देख रखा था कि, पुरुषों के साथ खेतों में काम करने के लिए ही कम आयु वाली लड़कियों की शादी की मांग ज्यादा रहती है। जिनकी बेटियां पुलिस में काम कर रही होती हैं, उनके मां-बाप को दहेज भी नहीं देना पड़ता है। 

इसीलिए मैंने अपने पिता से कहा कि, अभी शादी नहीं करूंगी। इस पर मेरे पिता ने शर्त रख दी कि, जाओ पुलिस भर्ती की परीक्षा दे दो, लेकिन अगर चयन न हुआ तो ब्याह कर दिया जाएगा। मैंने पुलिस में भर्ती होने की सारी औपचारिकताएं आसानी से पूरी कर डालीं, जिसके बाद मुझे पुलिस कांस्टेबल की नौकरी मिल गई। 

जब मेरे चयन की जानकारी मिली, तो परिवारवाले तो खुश ही हुए, साथ ही गांववालों ने भी खूब शाबासियां दी। मैं बीड जिले के एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट में अपनी नौकरी के चार साल गुजार चुकी हूं। मेरी कोशिश है कि अन्य लड़कियों को भी आगे बढ़ने में मदद कर सकूं।
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-विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।

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