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Tamil Nadu: स्टालिन सरकार के आरोपों पर राजभवन की सफाई; 'राज्यपाल ने 81% विधेयक किए मंजूर, देरी के आरोप झूठे'

Sat, 08 Nov 2025 12:18 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई

सार

तमिलनाडु में राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच विधेयकों को लेकर मचे रार के बीच अब राजभवन ने इस पर सफाई दी है। राजभवन ने सभी आरोपों को नकारते हुए कहा कि राज्यपाल ने अक्तूबर महीने तक 81% विधेयक मंजूर किए हैं, जो भी आरोप देरी को लेकर लगाए जा रहे हैं, वे सब झूठ हैं।
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स्टालिन सरकार के आरोपों पर राजभवन का पलटवार - फोटो : X @rajbhavan_tn / @mkstalin
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विस्तार
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तमिलनाडु राजभवन ने यह साफ किया है कि राज्यपाल आरएन रवि ने विधानसभा से पारित विधेयकों पर हस्ताक्षर करने में कोई देरी नहीं की है। राजभवन ने कहा कि राज्यपाल ने अब तक आए कुल विधेयकों में से 81 प्रतिशत को मंजूरी दी है। राजभवन ने एक बयान में कहा कि सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर यह आरोप लगाया जा रहा था कि राज्यपाल जानबूझकर विधेयकों पर हस्ताक्षर नहीं कर रहे हैं या मंजूरी में देर कर रहे हैं। लेकिन आधिकारिक रिकॉर्ड कुछ और बताते हैं।
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31 अक्तूबर 2025 तक 81% विधेयकों पर सहमति
राजभवन के अनुसार, 31 अक्तूबर 2025 तक प्राप्त सभी विधेयकों में से 81% पर राज्यपाल ने सहमति दी, और इनमें से 95 विधेयकों को तीन महीने के भीतर मंजूरी दी गई। बयान में यह भी बताया गया कि 13 प्रतिशत विधेयक राष्ट्रपति के विचारार्थ भेजे गए हैं, जिनमें से 60 प्रतिशत को राज्य सरकार की सिफारिश पर ही राष्ट्रपति के पास भेजा गया। बाकी विधेयक अक्तूबर के आखिरी सप्ताह में ही आए हैं और वे विचाराधीन हैं।
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सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा झूठ- राजभवन
राजभवन ने कहा, 'ये आंकड़े खुद साबित करते हैं कि सोशल मीडिया में फैलाई जा रही बातें पूरी तरह झूठी हैं। जिन विधेयकों को विधानसभा ने दोबारा पारित कर भेजा, उन्हें भी राज्यपाल ने मंजूरी दे दी है। हालांकि 10 विधेयक ऐसे थे जिन्हें राज्यपाल ने रोका था, और इस निर्णय की सूचना राज्य सरकार को दे दी गई थी।' बयान में कहा गया कि जब ये 10 विधेयक विधानसभा कीतरफ से दोबारा पारित किए गए और भेजे गए, तो राज्यपाल ने उन्हें राष्ट्रपति के पास भेज दिया क्योंकि वे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों के विपरीत थे और राज्य विधानसभा के अधिकार क्षेत्र से बाहर माने गए।

'हमेशा संविधान के दायरे में रहकर काम करते हैं राज्यपाल'
राजभवन ने कहा कि राज्यपाल ने हर विधेयक को पूरी सावधानी और संवैधानिक नियमों के अनुसार जांचा ताकि कानून का पालन हो और जनता के हित सुरक्षित रहें। बयान में कहा गया, 'राज्यपाल हमेशा संविधान के दायरे में रहकर काम करते हैं। उन्होंने किसी भी मामले में राजनीतिक दृष्टिकोण से निर्णय नहीं लिया है। उनका हर कदम पारदर्शी, निष्पक्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप है।'
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'राज्यपाल को तमिल संस्कृति, भाषा-परंपरा के प्रति गहरा सम्मान'
राजभवन ने यह भी कहा कि राज्यपाल को तमिल संस्कृति, भाषा और परंपराओं के प्रति गहरा सम्मान है। उन्होंने तमिलनाडु की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक धरोहर को बढ़ावा देने वाली कई पहल का समर्थन किया है और वे संविधान की मर्यादा में रहकर जनता के हित में काम करते रहेंगे।
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