अदालत ने मंडल को उनकी सात दिन की पुलिस हिरासत की अवधि खत्म होने के बाद पेश किए जाने पर जमानत दे दी। सरकारी वकील ने कहा, जांच अधिकारी ने पुलिस हिरासत की मांग की लेकिन अदालत ने केस डायरी और अन्य रिकॉर्ड की जांच के बाद उन्हें जमानत दी।
बीरभूम जिले की अदालत ने मंगलवार को हत्या के प्रयास के मामले में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता अनुब्रत मंडल को जमानत दे दी। पुलिस ने टीएसी कार्यकर्ता की शिकायत पर उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 325 (गंभीर रूप से चोट पहुंचाना) और 397 (हत्या का प्रयास) के तहत मामला दर्ज किया था। उनपर आरोप लगाया गया था कि उसके साथ मारपीट की गई।
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दुबराजपुर में उप-विभागीय अदालत ने मंडल को उनकी सात दिन की पुलिस हिरासत की अवधि खत्म होने के बाद पेश किए जाने पर जमानत दे दी। सरकारी वकील राजेंद्र प्रसाद डे ने कहा, जांच अधिकारी ने पुलिस हिरासत की मांग की लेकिन अदालत ने केस डायरी और अन्य रिकॉर्ड की जांच के बाद उन्हें जमानत दी। राज्य की ओर से मैंने जमानत याचिका का विरोध किया।
शिवठाकुर मंडल द्वारा पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत में आरोप लगाया गया था कि टीएमसी बीरभूम जिला अध्यक्ष ने करीब छह महीने पहले उसका गला घोंटकर उसे मारने का प्रयास किया था। पुलिस ने मामला दर्ज किया और मंडल के लिए वारंट हासिल करने के लिए 19 दिसंबर को अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
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मारपीट के मामले के समय पर सवाल भी उठे क्योंकि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) दिल्ली की एक अदालत के आदेश पर पशु तस्करी मामले में पूछताछ के लिए उन्हें दिल्ली ले जाने की तैयारी कर रहा था। पशु तस्करी मामले में उन्हें अगस्त में सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किया गया था।
हत्या के प्रयास के मामले में जमानत मिलने के बाद मंडल आसनसोन सुधार गृह में रहेंगे, क्योंकि वह पशु तस्करी के एक अन्य मामले में सजा काट रहे हैं। जमानत के आदेश को लेकर पत्रकारों से बात करते हुए टीएमसी नेता ने कहा, जो भी हुआ, मैं उससे सहमत हूं।