तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं। टीएमसी ने दावा किया कि राजनेताओं के खिलाफ दर्ज ईडी के करीब 98 प्रतिशत मामले विपक्षी नेताओं से जुड़े हैं।
टीएमसी प्रवक्ता साकेत गोखले ने ईडी की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले 11 वर्षों में एजेंसी ने 5,297 मामले दर्ज किए, लेकिन इनमें से कितने मामलों में मुकदमा चला, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए।
टीएमसी ने भाजपा पर लगाए क्या आरोप?
साकेत गोखले ने एक बयान में कहा, "राजनेताओं के खिलाफ ईडी के करीब 98 प्रतिशत मामले विपक्षी नेताओं के खिलाफ दर्ज किए गए। बाकी 2 प्रतिशत वे लोग हैं जो भाजपा की 'वॉशिंग मशीन' में जाकर शामिल हो गए।"
उन्होंने यह भी दावा किया कि ईडी के मामलों में दोषसिद्धि की दर 0.7 प्रतिशत है। गोखले के अनुसार, इसका मतलब है कि एजेंसी द्वारा दर्ज किए गए हर 1,000 मामलों में केवल सात मामलों में आरोपी दोषी पाए गए। उन्होंने कहा कि हर 100 मामलों में केवल एक मामला अदालत में पहुंचता है।
ममता बनर्जी के बैंक खातों को लेकर ईडी ने की क्या कार्रवाई?
गोखले की यह प्रतिक्रिया ईडी की उस कार्रवाई के बाद आई, जिसमें एजेंसी ने पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से जुड़े बैंक खातों में करीब 30 लाख रुपये के कथित हस्तांतरण का जिक्र किया था। ईडी के अनुसार, दुर्गा पूजा के 'प्रीव्यू शो' के प्रबंधन में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के दौरान पता चला कि इंद्रनील सेन से जुड़ी एक कंपनी ने बैंकिंग माध्यम से करीब 30 लाख रुपये ममता बनर्जी के बैंक खातों में भेजे थे।
ईडी के मुताबिक, सेन ने इस भुगतान को 'रॉयल्टी' बताया था। एजेंसी ने अपने बयान में इस लेनदेन को लेकर किसी आपराधिक कृत्य का आरोप नहीं लगाया। ईडी ने यह भी कहा कि उसकी जांच में सेन और उनके स्वामित्व वाली संस्था ऑक्टेव रिकॉर्ड्स के बैंक खातों में उनके कार्यकाल के दौरान 3.8 करोड़ रुपये से अधिक नकद जमा किए जाने की जानकारी सामने आई।
किन टीएमसी नेताओं पर दर्ज हुई एफआईआर?
मनी लॉन्ड्रिंग का यह मामला बोवबाजार थाने में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है। इसमें सेन, उनकी पत्नी और अन्य लोगों पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने 2022 से 2025 के बीच मासआर्ट के माध्यम से लोगों से पैसे जुटाए और खुद को गलत तरीके से यूनेस्को प्रायोजित संस्था बताया। ईडी के अनुसार, बाद में इन पैसों का इस्तेमाल निजी लाभ के लिए किया गया।
एजेंसी ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने दुर्गा पूजा के दर्शन को व्यवस्थित तरीके से व्यावसायिक गतिविधि में बदल दिया और सार्वजनिक त्योहार को निजी लाभ के लिए व्यावसायिक उद्यम की तरह इस्तेमाल किया। ईडी के अनुसार, मासआर्ट के माध्यम से कोलकाता के 24 दुर्गा पूजा पंडालों में आयोजित 'प्रीव्यू शो' के लिए आम लोगों को 1,749 रुपये से 5,499 रुपये तक के टिकट बेचे गए।
ईडी ने मामले पर क्या कहा?
जांच एजेंसी ने कहा कि इस कथित योजना में यूनेस्को के नाम, प्रतिष्ठा और लोगो का "भ्रामक" और "अनधिकृत" व्यावसायिक इस्तेमाल किया गया। ईडी के मुताबिक, 2023 और 2024 के दौरान ऐसे एक लाख से अधिक टिकट जारी किए गए। एजेंसी का दावा है कि इनसे प्राप्त रकम को बैंक खातों से नकद निकासी के जरिये या अलग-अलग खर्चों के नाम पर बट्टे खाते में डालकर कथित तौर पर निकाल लिया गया।