पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रहा सत्ता संघर्ष और गहरा गया है। टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, बागी विधायक नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने खुद को 'असली टीएमसी' बताते हुए बड़ा फैसला लिया है। इस गुट ने पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष ममता बनर्जी को पद से हटाने और पार्टी के दूसरे सबसे बड़े नेता अभिषेक बनर्जी को निलंबित करने का एलान किया है। सोमवार को न्यू टाउन स्थित एक होटल में ऋतब्रत गुट की बैठक हुई। इस गुट का दावा है कि इस बैठक में 60 विधायक और कोलकाता नगर निगम के 70 पार्षद शामिल हुए। इस बैठक में हावड़ा मध्य से विधायक अरूप रॉय को पार्टी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
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'फरवरी 2022 के बाद संगठन का पुनर्गठन नहीं हुआ'
ऋतब्रत बनर्जी गुट का कहना है कि पार्टी में 'संवैधानिक संकट' पैदा हो गया था। उनका दावा है कि टीएमसी के संविधान के अनुसार हर तीन साल में राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन होना चाहिए। आखिरी बार यह समिति फरवरी 2022 में बनी थी और उसके बाद संगठन का पुनर्गठन नहीं किया गया। ऋतब्रत बनर्जी ने बैठक में कहा कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी संगठनात्मक ढांचे का नवीनीकरण नहीं किया गया, इसलिए पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू करना जरूरी हो गया था।
अरूप रॉय बनाए गए पार्टी के नए अध्यक्ष- ऋतब्रत बनर्जी
इस बैठक के बाद नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने कहा- बागी टीएमसी नेताओं के विशेष सत्र में, सदस्यों ने सर्वसम्मति से अरूप रॉय को पार्टी का अध्यक्ष चुना है। उन्होंने आगे कहा कि सवाल असली या नकली होने का नहीं है, हम टीएमसी हैं और आज के विशेष सत्र की कार्यवाही के बारे में चुनाव आयोग (ईसी) को सूचित करेंगे। ऋतब्रत बनर्जी ने बताया कि पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास, विधायक फिरहाद हकीम, रथिन घोष और सबीना यास्मीन को बागी टीएमसी का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया।
ममता गुट ने ऋतब्रत को किया था निष्कासित
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कुछ दिन पहले ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी ने ऋतब्रत बनर्जी को कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया था। अब बागी गुट ने पलटवार करते हुए नया संगठन घोषित कर दिया है। ताजा घटनाक्रम के बाद तृणमूल कांग्रेस तीन हिस्सों में बंटी दिखाई दे रही है। पहला गुट ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला मूल टीएमसी है। दूसरा ऋतब्रत बनर्जी का 'असली टीएमसी' गुट है, जो अब विधानसभा में विपक्षी दल होने का दावा कर रहा है। वहीं तीसरा गुट करीब दो दर्जन लोकसभा सांसदों का बताया जा रहा है, जिन्होंने कथित तौर पर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया में विलय कर लिया है और संसद में एनडीए सरकार को समर्थन दे रहे हैं।
चुनाव चिह्न के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे बागी
इस राजनीतिक खींचतान के बीच अब पार्टी के चुनाव चिह्न और करीब 1,100 करोड़ रुपये के पार्टी फंड पर भी विवाद गहराने की संभावना है। बागी सांसदों ने संकेत दिए हैं कि वे पार्टी के चुनाव चिह्न पर दावा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। टीएमसी में बढ़ती अंदरूनी लड़ाई ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पार्टी का वास्तविक नेतृत्व किसके हाथ में है और आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति किस दिशा में जाएगी।
बैंक खाते फ्रीज होने पर हाईकोर्ट पहुंची पार्टी
उधर, टीएमसी ने अपने तीन बैंक खातों को फ्रीज किए जाने के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी ने अदालत से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि इन खातों को किसके निर्देश पर और किस कारण से फ्रीज किया गया। सोमवार को टीएमसी के वकीलों ने न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ के समक्ष याचिका दायर करने की अनुमति मांगी। अदालत ने आवेदन स्वीकार कर लिया है और इस मामले की औपचारिक सुनवाई सप्ताह के अंत तक शुरू हो सकती है। जिन तीन खातों को फ्रीज किया गया है, उनमें कुल करीब 440 करोड़ रुपये जमा बताए जा रहे हैं।
मामले की शुरुआत कुछ दिन पहले हुई थी, जब पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष और वरिष्ठ नेता अरूप बिस्वास ने एक निजी बैंक को पत्र लिखकर टीएमसी के तीन खातों को फ्रीज करने का अनुरोध किया था। उन्होंने दावा किया था कि पार्टी के भीतर चल रहे विवाद के कारण इन खातों के संचालन को लेकर असमंजस की स्थिति है। दरअसल, विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद टीएमसी ने 5 जून को संगठनात्मक फेरबदल किया था। पार्टी ने पूर्व सांसद सुभाशीष चक्रवर्ती को नया कोषाध्यक्ष नियुक्त किया था और अरूप बिस्वास को इस पद से हटा दिया गया था। हालांकि, बाद में अरूप बिस्वास ने बैंक को भेजे गए पत्र में खुद को ही पार्टी का वैध कोषाध्यक्ष बताया।
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अरूप बिस्वास के पत्र के बाद खाते फ्रीज
टीएमसी के कई बैंक खाते कोलकाता स्थित एक निजी बैंक की सेंट्रल प्लाजा शाखा में हैं। अरूप बिस्वास के पत्र के बाद इन खातों में लेन-देन अस्थायी रूप से रोक दिया गया, जिससे पार्टी के भीतर विवाद और बढ़ गया। इसके बाद पार्टी नेतृत्व ने उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी किया। अपने तीन पन्नों के जवाब में अरूप बिस्वास ने पार्टी के वित्तीय लेन-देन पर कई सवाल उठाए। उनका आरोप है कि वह केवल हिसाब-किताब संभालते थे, जबकि कई वित्तीय फैसले और लेन-देन उनकी जानकारी के बिना किए जाते थे। इस बीच, टीएमसी से बगावत कर चुके विधायकों के नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता रिताब्रत बनर्जी ने भी अरूप बिस्वास का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इन खातों में मौजूद धन की जांच होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि कहीं इसमें अवैध रूप से जुटाई गई रकम तो शामिल नहीं है। 19 जून को करीब 10 बागी टीएमसी विधायकों ने बिधाननगर साउथ थाने से इन बैंक खातों को तत्काल फ्रीज करने की मांग की थी। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और तीन खातों को फ्रीज कर दिया।