फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तृणमूल कांग्रेस नाम-चिह्न विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा- कब तक होगा अंतिम फैसला

Thu, 24 Sep 2026 03:46 PM IST
पवन पांडेय पीटीआई, नई दिल्ली
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट अपडेट - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चुनाव आयोग से अंतिम फैसला लेने की समयसीमा बताने को कहा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची व वी. मोहना की पीठ ममता बनर्जी की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने आयोग के TMC के नाम और ‘फूल और घास’ वाले चुनाव चिह्न को फ्रीज करने के फैसले को चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू से पूछा कि आयोग विवाद का अंतिम निपटारा कब तक कर सकता है। अदालत ने ममता बनर्जी की याचिका पर अगली सुनवाई 28 सितंबर को तय की है।
विज्ञापन


सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि आयोग ने चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के दौरान नाम और चिह्न फ्रीज करने का फैसला किया, जिससे उनकी पक्ष के पास प्रभावी राहत का रास्ता नहीं बचा। उन्होंने आयोग की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुझाव दिया कि आयोग को मामले की सुनवाई शुरू करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आयोग कुछ समय तक रोजाना सुनवाई कर सकता है और दोनों पक्षों को अपने सबूत व दस्तावेज पेश करने का मौका देकर विवाद पर फैसला कर सकता है।

6 अक्तूबर को पश्चिम बंगाल में विधानसभा उपचुनाव होना है। जस्टिस बागची ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। इस पर सिब्बल ने कहा कि वह चुनाव पर रोक लगाने की मांग नहीं कर रहे हैं। दरअसल, चुनाव आयोग ने अंतरिम फैसले के तहत दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं। दोनों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम इस्तेमाल करने से रोक दिया गया है और मूल चुनाव चिह्न को फिलहाल सुरक्षित रखा गया है। आयोग का कहना है कि विवाद का अंतिम फैसला चुनाव चिह्न आदेश, 1968 के तहत विस्तृत सुनवाई के बाद किया जाएगा।
विज्ञापन

चार हाईकोर्ट में 12 अतिरिक्त जज होंगे स्थायी, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की मंजूरी
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने आंध्र प्रदेश, केरल, उत्तराखंड और गुवाहाटी हाईकोर्ट में 12 अतिरिक्त जजों को स्थायी जज नियुक्त करने की मंजूरी दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने 23 सितंबर को हुई बैठक में इन नियुक्तियों से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी। कॉलेजियम में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के अलावा जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस बीवी नागरत्ना शामिल हैं। कॉलेजियम के फैसले के अनुसार, आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के पांच अतिरिक्त जजों को स्थायी जज बनाने की मंजूरी दी गई है। इनमें जस्टिस महेश्वर राव कुंचेम, जस्टिस थूटा चंद्र धन शेखर, जस्टिस चल्ला गुणरंजन, जस्टिस अवधनम हरिहरनाध शर्मा और डॉ. जस्टिस यदवल्ली लक्ष्मण राव शामिल हैं।

केरल हाईकोर्ट के पांच अतिरिक्त जजों को भी स्थायी नियुक्ति के लिए मंजूरी मिली है। इनमें जस्टिस पी. कृष्ण कुमार, जस्टिस केवी जयकुमार, जस्टिस मुरली कृष्ण एस., जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन और जस्टिस पीवी बालकृष्णन शामिल हैं। इसके अलावा उत्तराखंड हाईकोर्ट के अतिरिक्त जज जस्टिस सुभाष उपाध्याय को स्थायी जज बनाने की मंजूरी दी गई है। गुवाहाटी हाईकोर्ट के अतिरिक्त जज जस्टिस कौशिक गोस्वामी की स्थायी नियुक्ति को भी कॉलेजियम ने मंजूरी दी है।

अतिरिक्त जजों की नियुक्ति आमतौर पर निश्चित अवधि के लिए होती है। स्थायी जज के तौर पर नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। कॉलेजियम की सिफारिश के बाद नियुक्ति की संवैधानिक प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस फैसले के साथ चार हाईकोर्ट में लंबे समय से अतिरिक्त जज के रूप में काम कर रहे इन 12 न्यायाधीशों के स्थायी पद पर नियुक्त होने का रास्ता साफ हुआ है।
 

आप नेता दीपक सिंगला की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का ईडी को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार आम आदमी पार्टी नेता दीपक सिंगला की जमानत याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय से जवाब मांगा है। सिंगला ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 9 सितंबर के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची व वी. मोहना की पीठ ने गुरुवार को सिंगला की याचिका पर ईडी को नोटिस जारी किया। सिंगला की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल अदालत में पेश हुए। ईडी ने सिंगला को 18 मई को गिरफ्तार किया था।

यह मामला महेश टिंबर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ी कथित बैंक धोखाधड़ी से शुरू हुआ। सीबीआई ने 2018 में तत्कालीन ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के एक सहायक महाप्रबंधक की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की थी। आरोप था कि कंपनी ने सिंगापुर स्थित अपनी सहयोगी कंपनी, निजी लोगों और बैंक के एक अधिकारी के साथ मिलकर विदेशी लेटर ऑफ क्रेडिट में कथित तौर पर धोखाधड़ी से बदलाव किए। जांच में बैंक को करीब 155.21 करोड़ रुपये के कथित नुकसान की बात सामने आई। बाद में कंपनी पर मूल बकाया राशि करीब 239.46 करोड़ रुपये बताई गई। सीबीआई ने 10 अगस्त 2020 को मामले में चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून यानी पीएमएलए के तहत जांच शुरू की।

ईडी की जांच में आरोप लगाया गया कि विदेशी लेटर ऑफ क्रेडिट की राशि 21.47 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 173.03 करोड़ रुपये कर दी गई। जांच एजेंसी ने आयात से जुड़े दस्तावेजों में कथित फर्जीवाड़े का भी आरोप लगाया। ईडी ने सिंगला को अपनी दूसरी पूरक अभियोजन शिकायत में आरोपी बनाया। एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने मुख्य आरोपियों को अपराध से हासिल रकम छिपाने, उसे अलग-अलग स्तरों पर भेजने और विभिन्न खातों व संस्थाओं के जरिए घुमाने में मदद की।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा था कि ईडी द्वारा पेश सामग्री से प्रथम दृष्टया सिंगला की भूमिका की जांच जरूरी दिखती है। अब सुप्रीम कोर्ट ईडी का जवाब मिलने के बाद उनकी जमानत याचिका पर आगे सुनवाई करेगा।

एआईएमआईएम विधायक मुफ्ती मोहम्मद इस्माइल की चुनाव जीत को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मालेगांव सेंट्रल सीट से एआईएमआईएम विधायक मुफ्ती मोहम्मद इस्माइल अब्दुल खलीक के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिकाएं गुरुवार को खारिज कर दीं। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई थीं। इनमें बॉम्बे हाईकोर्ट के 8 जून के फैसले को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने खलीक के निर्वाचन के खिलाफ दायर चुनाव याचिका को खारिज कर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव नवंबर 2024 में हुए थे। मालेगांव सेंट्रल सीट से मुफ्ती मोहम्मद इस्माइल अब्दुल खलीक ने 162 वोटों के मामूली अंतर से जीत दर्ज की थी। चुनाव हारने वाले एक उम्मीदवार ने उनके निर्वाचन को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
 
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि खलीक ने जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 के तहत परिभाषित ‘भ्रष्ट आचरण’ किया। चुनाव याचिका में दावा किया गया था कि खलीक धार्मिक नेता हैं और उन्होंने मतदाताओं के बीच धार्मिक प्रभाव का इस्तेमाल किया। आरोप था कि मतदाताओं को ‘ईश्वरीय नाराजगी या आध्यात्मिक निंदा’ के डर के जरिए प्रभावित करने की कोशिश की गई। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया था कि महिलाओं को लेकर पर्चे बांटकर मतदाताओं को प्रभावित किया गया। इन पर्चों में कथित तौर पर कहा गया था कि जो लोग किसी महिला को अपना नेता चुनेंगे, वे कभी तरक्की नहीं कर सकते। चुनाव में दो महिला उम्मीदवार भी मैदान में थीं। इसके अलावा याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि धर्म और धार्मिक भावनाओं के आधार पर भी वोट मांगे गए। खलीक ने हाईकोर्ट में चुनाव याचिका खारिज करने की मांग करते हुए आरोपों को अस्पष्ट, बिना आधार और निराधार बताया था। हाईकोर्ट ने माना था कि याचिका में सुनवाई योग्य पूरा आधार नहीं बनाया गया है और उसे खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के गुरुवार के फैसले के बाद मालेगांव सेंट्रल सीट पर खलीक का निर्वाचन बरकरार रहेगा।
विज्ञापन

दल-बदल मामले में बीआरएस विधायक दानम नागेंद्र को सुप्रीम कोर्ट से झटका
सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना के बीआरएस विधायक दानम नागेंद्र की उस याचिका को गुरुवार को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने विधानसभा से अपनी अयोग्यता को चुनौती दी थी। अदालत ने तेलंगाना हाईकोर्ट के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें नागेंद्र को दल-बदल के मामले में विधायक पद से अयोग्य घोषित किया गया था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने का कोई आधार नहीं है। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने मौखिक टिप्पणी करते हुए नागेंद्र के मामले को ‘आया राम, गया राम, फिर आया राम’ जैसा बताया। यह मुहावरा बार-बार राजनीतिक दल बदलने वाले नेताओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
 
नागेंद्र खैरताबाद विधानसभा सीट से बीआरएस विधायक थे। उन्होंने 2024 का लोकसभा चुनाव सिकंदराबाद सीट से कांग्रेस के टिकट पर लड़ा था। हाईकोर्ट ने उन्हें 23 अप्रैल 2024 से तेलंगाना विधानसभा की सदस्यता के लिए अयोग्य घोषित किया था। यह मामला भाजपा विधायक एलेटी महेश्वर रेड्डी और बीआरएस नेता पी. कौशिक रेड्डी की याचिकाओं से जुड़ा था। उन्होंने नागेंद्र को संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्य घोषित करने की मांग की थी। इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष गद्दाम प्रसाद कुमार ने 11 मार्च को उनकी अयोग्यता की मांग वाली याचिकाएं खारिज कर दी थीं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें