क्राउडफंडिंग के जरिए एकत्रित धन के कथित दुरूपयोग से जुड़े एक मामले में तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता साकेत गोखले को गुरुवार को जमानत देने से एक अदालत ने इनकार कर दिया। आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 406 (आपराधिक विश्वासघात) और 467 (जालसाजी) के तहत मामला दर्ज है, इसको देखते हुए अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट मनीष चौहान ने जमानत याचिका खारिज कर दी।
गोखले को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। वहीं राहत के लिए अब उन्हें सेशन कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा। गोखले को अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने 30 दिसंबर को क्राउडफंडिंग के माध्यम से एकत्र किए गए धन के कथित दुरुपयोग के मामले में दिल्ली से गिरफ्तार किया था। उन्हें चार दिसंबर तक पुलिस हिरासत (रिमांड) में भेज दिया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, अहमदाबाद शहर के एक निवासी द्वारा दर्ज की गई शिकायत पर दर्ज की गई थी, जिसने ऑनलाइन मोड के माध्यम से गोखले को 500 रुपये दान करने का दावा किया था। गोखले ने तर्क दिया कि शिकायतकर्ता एक सरकारी कर्मचारी था, और उसके खिलाफ द्वेष के कारण प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
रिपोर्ट के अनुसार, अहमदाबाद शहर के एक निवासी द्वारा दर्ज की गई शिकायत पर दर्ज की गई थी, जिसने ऑनलाइन मोड के माध्यम से गोखले को 500 रुपये दान करने का दावा किया था। गोखले ने तर्क दिया कि शिकायतकर्ता एक सरकारी कर्मचारी था, और उसके खिलाफ द्वेष के कारण प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
टीएमसी नेता के वकील ने कहा कि उन्होंने एकत्रित धन पर कर भी चुकाया था। वकील ने कहा कि उसने जिस क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया, उसका इस्तेमाल राजनीतिक दल भी करते हैं। वकील ने कहा कि गोखले बीमार हैं और उन्हें हर दिन लगभग 14 दवाएं लेने की जरूरत है, अत: उनको जमानत दी जाए।
वहीं सरकारी वकील ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि मामला सिर्फ 500 रुपये का नहीं है क्योंकि गोखले ने क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म 'अवर डेमोक्रेसी' के जरिए 1,700 से अधिक लोगों से लगभग 80 लाख रुपये एकत्र किए थे और उस पैसे का इस्तेमाल निजी इस्तेमाल के लिए किया था।