टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा इन दिनों सुर्खियों में हैं। इस बीच उन्होंने उनका साथ देने वाले विपक्षी सांसदों को धन्यवाद दिया। दरअसल, कैश फॉर क्वेरी मामले में मोइत्रा गुरुवार को लोकसभा आचार समिति के समक्ष पेश हुईं थीं। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि उनसे अभद्र और अपमानजनक सवाल पूछे गए इसलिए उन्होंने इसका विरोध किया।
आचार समिति के समक्ष पेश होने के बाद एक साक्षात्कार में मोइत्रा ने कहा कि उनसे उनके निजी जीवन के बारे में सवाल किए गए, जो अनुचित हैं। मैंने अपना विरोध दर्ज कराया है। साथ ही हर प्रासंगिक प्रश्नों के जवाब मैं हलफनामे से दे दूंगी। नियम तो यह है कि समिति के सवालों के बारे में बात नहीं करनी चाहिए, लेकिन उन्होंने मेरा ‘वस्त्रहरण’ किया, जिस वजह से मुझे खुलकर बात करनी पड़ रही है।
मोइत्रा ने आगे कहा कि समिति में कुल 11 सदस्य थे लेकिन अध्यक्ष के सवालों के कारण पांच सांसद विरोध में वॉकआउट कर गए। यह अनैतिक था। समिति अध्यक्ष तो एक स्क्रिप्ट लेकर आए थे, जिसे वह सिर्फ पढ़ रहे थे। उन्होंने मेरे निजी जीवन के बारे में सवाल किए, जिसका असल में कोई मतलब नहीं था। समिति अध्यक्ष मुझसे पूछ रहे थे कि आप रात में किससे बात करते हो? आप कॉल डिटेल दे सकती हैं क्या? क्या आप अपने एक्स के साथ किसी होटल में गई हैं? क्या आप वहां रुकी हैं? पिछले पांच साल आप कहां-कहां रहे? तुम अमुक को अपना दोस्त कहती हो, क्या उसकी पत्नी को इस बारे में पता है? केवल समिति अध्यक्ष ऐसे सवाल कर रहे थे, बाकि भाजपा सदस्य ठीक थे लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा।
मोइत्रा ने कहा कि यह पहली बार है कि जब पांच सासंदों ने समिति अध्यक्ष के सवालों का विरोध किया हो। विपक्षी सासंदों ने उनके सवालों को बकवास बताया है। आचार समिति के नाम पर अनैतिक और अनुचित व्यवहार किया जा रहा है। मैंने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा है और उन्हें इसकी जानकारी दे दी है।
पश्चिम बंगाल के मंत्री ने भी साधा निशाना
मामले में पश्चिम बंगाल के मंत्री शशि पांजा ने कहा कि आचार समिति की बैठक में महाभारत जैसा दृश्य देखा गया। जब समिति सदस्य दुर्योधन की तरह एक महिला सासंद के साथ अनुचित व्यवहार कर रहे थे तो अध्यक्ष धृतराष्ट्र की तरह बैठे थे। पांजा ने कहा कि यह अनैतिक पैनल था। महिला सांसद का अपमान करना ओछी मानसिकता का उदाहरण है।
यह है मामला
बता दें कि यह पूरा विवाद तब खड़ा हुआ जब बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने स्पीकर को पत्र लिखकर टीएमसी सांसद के खिलाफ 'कैश फॉर क्वेरी' सबूत देने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया था कि ये सबूत वकील जय अनंत देहाद्राई द्वारा प्रदान किए गए थे। अब इस मामले में संसद की आचार समिति ने दुबे और अधिवक्ता देहाद्राई दोनों को 26 अक्टूबर को आरोपों के मौखिक साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए बुलाया है।