वरिष्ठ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता मदन मित्रा ने ने पार्टी की राजनीतिक परामर्श एजेंसी आई-पीएसी (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि आई-पीएसी अवसरवादी लोगों को सुविधा देकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की छवि को खराब करने की कोशिश की है। टीएमसी नेता के इन आरोपों पर फिलहाल आई-पीएसी अधिकारियों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
बांग्ला न्यूज चैनल पर बातचीत करते हुए मदन मित्रा ने कहा, "ममता बनर्जी के नाम के साथ कभी कोई घोटाला नहीं जुड़ा। हालांकि, उनकी प्रतिष्ठा पर पैकवाले दाग लगा रहे हैं।" पूर्व मंत्री ने दावा किया कि एजेंसी से जुड़े लोगों ने गहरा प्रभाव डाला है। वे मंत्रियों पर दबाव बना रहे हैं और विभिन्न मुद्दों पर तुरंत कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उन्होंने आई-पीएसी के दृष्टिकोण पर कटाक्ष करते हुए कहा, "हमने 2009 से बिना किसी बाहरी एजेंसी की मदद से चुनाव जीता, अपने दम पर हमने बैठकें और रैलियां आयोजित की। आई-पीएसी के कुछ लोगों की एंट्री सेबाहरी हस्तक्षेप शुरू हुआ।"
टीएमसी के लोग पैसे के लिए बेच रहे पार्टी का पद
आई-पीएसी पर निशाना साधने से पहले उन्होंने चेतावनी दी थी कि टीएमसी के भीतर कुछ लोग पैसे के लिए पार्टी के पद बेच रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि यह मुद्दा समय के साथ और खराब हो गया है। उन्होंने जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार के भी आरोप लगाए। मदन मित्रा ने दावा किया कि टीएमसी जिला समितियां बड़ी रकम के लिए पार्टी के पद को बेच रही हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में यह स्थिति और भी ज्यादा खराब हो गई है।
टीएमसी नेता ने कहा, "अगर कोई यह पूछता है कि क्या ये पैसे ममता बनर्जी या अभिषेक बनर्जी तक पहुंचते हैं तो इसका जवाब है नहीं।" उन्होंने आगे कहा कि भ्रष्टाचार जिले और ब्लॉक स्तर पर हो रहे हैं। मदन मित्रा ने पार्टी के नेताओं से सतर्क रहने का आग्रह करते हुए चेतावनी दी कि ऐसे काम 2026 के चुनावों से पहले टीएमसी की छवि को नुकसान पहुंचा सकती है।