शिक्षक भर्ती मामले में टीएमसी की युवा शाखा के नेताओं शांतनु बनर्जी और कुंतल घोष की गिरफ्तारी के बाद अब पार्टी ने भी उनसे किनारा कर लिया है। मंगलवार को एक प्रेस कांफ्रेंस करके टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं और राज्य के मंत्रियों शशि पांजा और ब्रत्य बसु ने दोनों नेताओं को पार्टी से निकालने का एलान किया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि टीएमसी का किसी भी घोटाले से कोई संबंध नहीं है।
शशि पांजा ने इस दौरान कहा कि अगर कोई अपने हित साधने के लिए अपनी पार्टी के पद का दुरुपयोग करता है, तो उन्हें जवाब देना होगा। ऐसे में पार्टी ने कुंतल घोष और शांतनु बनर्जी को निष्कासित करने का फैसला किया है।
गौरतलब है कि शिक्षक भर्ती घोटाले में कथित संलिप्तता के आरोप में शांतनु बनर्जी को पिछले हफ्ते प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था। वहीं कुंतल घोष की गिरफ्तारी फरवरी में हुई थी।
सीबीआई के अनुसार, 2014 और 2021 के बीच पूरे पश्चिम बंगाल में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए टीएमसी नेताओं द्वारा कथित तौर पर 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई गई थी। बंगाल के निजी संचालित कॉलेजों और संस्थानों के संघ के अध्यक्ष तपस मंडल ने सीबीआई द्वारा पूछताछ के दौरान कुंतल घोष पर नौकरी चाहने वालों से पैसे उगाहने का आरोप लगाया था।
पिछले साल जुलाई में टीएमसी के वरिष्ठ नेता और मंत्री पार्थ चटर्जी को ईडी ने स्कूल भर्ती घोटाले में गिरफ्तार किया था। जिससे ममता बनर्जी सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई थी। हालांकि बाद में टीएमसी ने जल्दी से उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया, पहले उन्हें राज्य मंत्रिमंडल से हटा दिया और फिर उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया।
सीबीआई को पिछले साल मई में 2014 और 2021 के बीच पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) और पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा गैर-शिक्षण कर्मचारियों (ग्रुप सी और डी) और शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति की जांच करने का निर्देश दिया गया था। कथित तौर पर चयन परीक्षा में विफल होने के बाद नौकरी पाने के लिए 5 लाख रुपये से 15 लाख रुपये तक की रिश्वत दी थी।