‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की संभावना तलाशने के मद्देनजर विधि आयोग ने विभिन्न राजनीतिक दलों से विचार-विमर्श शुरू कर दिया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), सीपीआई व अन्य दलों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है।
शनिवार को टीएमसी, सीपीआई, शिरोमणि अकाली दल सहित छह दलों के प्रतिनिधियों से विधि आयोग ने इस मसले पर अपना पक्ष रखा। शिरोमणि अकाली दल को छोड़ लगभग सभी दल लोकसभा और विधान सभा चुनावों के साथ कराने का विरोध किया।
जबकि एआईएडीएमके ने कहा कि उसे 2021 के बाद एक साथ दोनों चुनावों कराने पर कोई आपत्ति नहीं है। पार्टी नेता डी. जयकुमार ने कहा कि पार्टी सैद्धांतिक रूप से इस प्रस्ताव पर सहमत है लेकिन इसे 2021 के बाद लागू किया जाना चाहिए।
वहीं अधिकतर दलों का कहना था कि संघीय व्यवस्था में यह संभव नहीं है। तीन दिन तक चलने वाले इस परामर्श के इस दौर में शनिवार को तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी ने विधि आयोग से कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों को एकसाथ कराना गैर लोकतांत्रिक और व्यावहारिक नहीं है।
टीएमसी का कहना है कि अगर किसी कारणवश केंद्र सरकार गिर जाए तो क्या सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव होंगे। सीपीआई के अतुल अंजान ने कहा कि ऐसा करना संविधान के मूल ढांचे के विरुद्ध है।
उन्होंने कहा कि यह मसला विधि आयोग के क्षेत्राधिकार में नहीं है। इसके लिए संविधान में संशोधन की दरकार है। गोवा में भाजपा की सहयोगी दल गोवा फॉरवर्ड पार्टी के अध्यक्ष विजय सरदेसाई ने बताया कि यह अव्यावहारिक है। डीएमडीके के प्रतिनिधि ने भी एक साथ चुनाव कराने के प्रस्ताव का विरोध किया।
विधि आयोग रविवार और मंगलवार को और भी राजनीतिक दलों प्रतिनिधियों से मिलकर उनका पक्ष जानेगा। दिलचस्प है कि विधि आयोग के तीन दिनों के कार्यक्रम में फिलहाल कांग्रेस के प्रतिनिधि से मिलने का समय नहीं रखा गया है।
विपक्ष के साथ संयुक्त फैसला लेंगे: कांग्रेस
नई दिल्ली। ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की पहल पर कांग्रेस ने साफ किया है वो किसी बैठक का बहिष्कार नहीं कर रही है। कांग्रेस प्रवक्ता आरपीएन सिंह का कहना है कि कांग्रेस इस मुद्दे पर सभी विपक्षी पार्टियों से बातचीत कर उनकी राय जानने और सलाह के बाद ही संयुक्त रूप से कोई फैसला लेगी।