पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी असंतोष बढ़ गया है। नेतृत्व की कार्यशैली और टिकट वितरण को लेकर कई सांसद और विधायक नाराज बताए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक टीएमसी के कई राज्यसभा सांसद भाजपा के संपर्क में हैं, हालांकि भाजपा जल्दबाजी से बचते हुए सोच-समझकर फैसला लेना चाहती है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा के हाथों करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस को निकट भविष्य में एक और बड़ा झटका लग सकता है। पश्चिम बंगाल में सत्ता गंवाने के बाद पार्टी नेतृत्व के कामकाज के नाराज पार्टी के कई सांसद भाजपा के संपर्क में हैं। इनमें से ज्यादातर राज्यसभा के सदस्य हैं। हालांकि चुनाव परिणाम आने के बाद तृणमूल कार्यकर्ताओं के पार्टी में प्रवेश पर अस्थाई रोक लगा चुकी भाजपा इस मामले में फूंक-फूंक कर कदम उठाने की रणनीति के तहत तत्काल कोई फैसला लेने से परहेज बरत रही है।
दरअसल चुनाव परिणाम आने के बाद पार्टी में पूर्व सीएम ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के खिलाफ एक गुट काफी मुखर है। यह गुट चुनाव में टिकट बंटवारे में अभिषेक की कथित मनमानी सहित सरकार चलाने के तरीके से नाराज रहा है। सांसद काकोली घोष दस्तीदार का बारासात जिलाध्यक्ष सहित कई विधायकों की पार्टी की बैठकों से बरती जा रही दूरी इसी ओर इशारा कर रही है। अब प्रतिकूल परिणाम आने के बाद इस गुट को पार्टी में अपना भविष्य नहीं दिख रहा।
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ज्यादातर राज्यसभा के सदस्य संपर्क में
सूत्रों के मुताबिक टीएमसी में नाराज चल रहे नेताओं में राज्य इकाई के कई वरिष्ठ नेताओं में ज्यादा संख्या राज्यसभा के सांसदों की है। कुछ लोकसभा के सांसद और विधायक भी नाराज हैं। राज्यसभा में टीएमसी के 13 तो लोकसभा में 28 सदस्य हैं। हाल ही में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा के सात सदस्यों ने भाजपा का दामन थामा था।
जल्दबाजी नहीं दिखाएगी भाजपा
इस संदर्भ में भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि करारी शिकस्त के बाद टीएमसी में कई स्तर पर नाराजगी खुल कर सामने आ रही है। भाजपा नहीं चाहती कि उसका द्वार सभी के लिए खुल जाए। इससे पार्टी के मूल कार्यकर्ताओं में असमंजस का भाव पैदा होगा।
इसी को देखते हुए नतीजे आने के बाद ही पार्टी में दूसरे दलों के नेताओं-कार्यकर्ताओं के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। अब आगे क्या होगा, इसका निर्णय केंद्रीय नेतृत्व को करना है। हो सकता है भविष्य में दिनेश त्रिवेदी जैसे स्वच्छ छवि के नेताओं के लिए पार्टी का दरवाजा खुल जाए।
थोड़े इंतजार के बाद फैसला
ज्यादा संभावना है कि भाजपा कुछ दिनों के इंतजार के बाद सांसदों के प्रवेश को हरी झंडी दे देगी। गौरतलब है कि उच्च सदन में भाजपा बहुमत के बेहद करीब (113 सदस्य) है। राजग को पहले ही बहुमत हासिल है। अगर टीएमसी के सात-आठ सांसद पाला बदलते हैं तो भाजपा अपने दम पर करीब-करीब बहुमत हासिल कर लेगी। चूंकि पार्टी की रणनीति फिर से महिला आरक्षण पर दाव लगाने की है, ऐसे में यह संख्या बल बेहद महत्वपूर्ण होगा।