पश्चिम बंगाल में विधानसभा के बाद अब तृणमूल कांग्रेस के संसदीय दल में संभावित टूट की अटकलों ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच पार्टी के संसदीय दल के नेता और महासचिव अभिषेक बनर्जी तय कार्यक्रम से एक दिन पहले शनिवार को दिल्ली पहुंच गए। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यह फैसला ममता बनर्जी के निर्देश पर लिया गया।
राजनीतिक हलकों में इसे सांसदों के बीच संभावित असंतोष को थामने और डैमेज कंट्रोल की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, अभिषेक को पहले रविवार को दिल्ली पहुंचना था, लेकिन अंतिम समय में कार्यक्रम बदल दिया गया। इसी बीच दिल्ली में रविवार को तृणमूल सांसदों की एक अहम बैठक भी बुलाई गई है। माना जा रहा है कि इसमें मौजूदा राजनीतिक हालात और संसदीय दल की रणनीति पर चर्चा होगी। विधानसभा में ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में विधायकों के अलग रुख अपनाने के बाद अब संसदीय दल को लेकर भी अटकलें तेज हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सांसदों के स्तर पर भी समर्थन जुटाने की कोशिशें चल रही हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
दिल्ली में होनी है टीएमसी सांसदों की बैठक
8 जून को दिल्ली में विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की बैठक प्रस्तावित है। इसी दिन प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी अभिषेक बनर्जी को पूछताछ के लिए तलब किया है। ऐसे में तृणमूल के भीतर और बाहर दोनों मोर्चों पर नेतृत्व की परीक्षा मानी जा रही है। बागी खेमे से जुड़े सूत्रों का दावा है कि फिलहाल जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाया जाएगा। पहले पर्याप्त संख्या में सांसदों का समर्थन जुटाने की कोशिश की जा रही है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि इसके बाद संसदीय स्तर पर अगली रणनीति तय की जा सकती है। बारासात की सांसद काकोली घोष दस्तीदार पहले ही संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देकर असंतोष जता चुकी हैं। इसके अलावा देव, रचना बनर्जी, यूसुफ पठान, जून मालिया और सायोनी घोष के नाम भी राजनीतिक चर्चाओं में हैं।
बागी खेमे की कथित रणनीति
पहले पर्याप्त संख्या में सांसदों का समर्थन जुटाना। -दल-बदल विरोधी कानून के प्रावधानों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ना। जल्दबाजी से बचते हुए सही समय का इंतजार करना। -पर्याप्त समर्थन मिलने के बाद ही संसदीय स्तर पर अगला कदम उठाना।