क्या आप जानते हैं राष्ट्रीय ध्वज के ये जरूरी नियम?
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केंद्र सरकार ने सोमवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े नियमों का पालन करने का निर्देश दिया। गृह मंत्रालय ने राज्यों के मुख्य सचिवों को भेजे संदेश में कहा कि लोगों के साथ-साथ सरकारी संस्थाओं और संगठनों में भी राष्ट्रीय ध्वज को प्रदर्शित करने से जुड़े कानून, परंपराओं और नियमों की जानकारी की कमी दिखाई देती है। मंत्रालय ने कहा कि तिरंगा देश के लोगों की उम्मीदों और आकांक्षाओं का प्रतीक है। इसलिए उसे हमेशा सम्मान का स्थान मिलना चाहिए। राज्यों से कहा गया है कि वे इस संबंध में बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाएं और प्रिंट तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए इसका व्यापक प्रचार करें।
क्या कागज का तिरंगा इस्तेमाल करना गलत है?
सरकार ने साफ किया है कि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय, सांस्कृतिक और खेल आयोजनों के दौरान आम लोग कागज से बने तिरंगे को लहरा सकते हैं। लेकिन कार्यक्रम समाप्त होने के बाद ऐसे झंडों को जमीन पर फेंकना या इधर-उधर छोड़ना नहीं चाहिए। इसका मकसद राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान को बनाए रखना है। फ्लैग कोड के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज को हमेशा सम्मानजनक स्थान पर रखा जाना चाहिए। किसी भी हालत में फटा, क्षतिग्रस्त या अस्त-व्यस्त तिरंगा प्रदर्शित नहीं किया जाना चाहिए। यानी तिरंगा इस्तेमाल करने के बाद उसके सम्मान का भी ध्यान रखना जरूरी है।
तिरंगे को लेकर कौन-कौन से नियम लागू हैं?
फ्लैग कोड के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज हाथ से काता और हाथ से बुना हुआ या मशीन से बनाया हुआ हो सकता है। इसके लिए कपास, पॉलिएस्टर, ऊन, रेशम या खादी बंटिंग का इस्तेमाल किया जा सकता है। कोई आम नागरिक, निजी संस्था या शैक्षणिक संस्थान सभी दिनों और अवसरों पर तिरंगा फहरा या प्रदर्शित कर सकता है, लेकिन उसे तिरंगे की गरिमा और सम्मान का ध्यान रखना होगा। 19 जुलाई 2022 के आदेश के जरिए फ्लैग कोड में संशोधन किया गया था। खुले में या किसी नागरिक के घर पर प्रदर्शित तिरंगा दिन-रात फहराया जा सकता है।
क्या तिरंगे के साथ दूसरा झंडा भी लगाया जा सकता है?
मंत्रालय ने तिरंगे को दूसरे झंडों के साथ लगाने को लेकर भी स्पष्ट नियम बताए हैं। राष्ट्रीय ध्वज को एक ही मस्तूल के शीर्ष पर किसी दूसरे झंडे के साथ एक साथ नहीं फहराया जा सकता। इसके अलावा किसी दूसरे झंडे या सजावटी पट्टी को तिरंगे से ऊपर या उसके बराबर नहीं रखा जा सकता। तिरंगे को किसी वाहन पर भी नहीं लगाया जा सकता, सिवाय उन विशिष्ट संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के वाहनों के, जिनका उल्लेख फ्लैग कोड में किया गया है। इनमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल जैसे पद शामिल हैं।
हर घर तिरंगा अभियान के बीच सरकार ने क्या अपील की?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोगों से हर घर तिरंगा अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है। उन्होंने तिरंगा यात्राओं, तिरंगा रैलियों और सामूहिक रूप से वंदे मातरम गाने के जरिए अभियान में भाग लेने को कहा। उन्होंने लोगों से घरों पर तिरंगा फहराने और हर घर तिरंगा अभियान की वेबसाइट पर अपनी तस्वीर साझा करने की भी अपील की। शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल से शुरू हुआ यह अभियान देश की सामूहिक शक्ति को दर्शाता है। इस साल वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ भी है। ऐसे में सरकार चाहती है कि देशभर में तिरंगे के सम्मान और राष्ट्रीय भावना से जुड़े कार्यक्रमों के साथ नियमों की जानकारी भी लोगों तक पहुंचे