देश की जेलों में बंद कैदियों को शिक्षा और आत्मविकास से जोड़ने के उद्देश्य से ‘तिनका जेल पाठशाला’ नामक नई शैक्षिक पहल शुरू की गई है। इस पहल के तहत कैदियों को रिकॉर्ड की गई मास्टर क्लास उपलब्ध कराई जाएगी, जो हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में जेल-अनुमोदित माध्यमों से पहुंचाई जाएगी।
इस कार्यक्रम के नए स्वरूप का उद्घाटन इंडिया हैबिटाट सेंटर के निदेशक प्रोफेसर के. जी. सुरेश ने किया। उन्होंने कहा कि जेलों का उद्देश्य केवल सजा देना नहीं, बल्कि सुधार और पुनर्वास होना चाहिए। उनके मुताबिक, कैदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पारंपरिक कामकाजी प्रशिक्षण के साथ-साथ नैतिकता, व्यक्तित्व विकास, समय प्रबंधन और जीवन कौशल की शिक्षा भी जरूरी है।
इस पहल को तैयार करने वाली दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्री राम कॉलेज के पत्रकारिता विभाग की प्रमुख प्रोफेसर वर्तिका नंदा के अनुसार, इसका मुख्य उद्देश्य जेल में बंदियों के खाली समय को सार्थक बनाना और उन्हें ऐसी उपयोगी सामग्री उपलब्ध कराना है, जिससे वे अपनी पढ़ाई जारी रख सकें और व्यक्तिगत विकास कर सकें। उन्होंने कहा कि कई कैदी जेल के दौरान पढ़ाई करना चाहते हैं, लेकिन व्यवस्थित और समकालीन शिक्षण सामग्री तक उनकी पहुंच सीमित रहती है।
दरअसल, विभिन्न जेलों में पहले से चल रहे कार्यक्रमों के अनुभव से यह सामने आया कि उपलब्ध शैक्षिक सामग्री अक्सर सीमित दायरे की होती है और कैदियों की वास्तविक जरूरतों से मेल नहीं खाती। इसी को ध्यान में रखते हुए इस पाठशाला को अधिक व्यावहारिक और जरूरत-आधारित बनाया गया है।
पाठशाला के अंतर्गत शिक्षा, सामान्य जागरूकता, मानसिक स्वास्थ्य, नशामुक्ति, संगीत, नए कौशल और प्रेरक कहानियों जैसे विषयों को शामिल किया गया है। कार्यक्रम को छोटे और आसान प्रारूप में तैयार किया जाएगा, ताकि कैदी अपने दैनिक जीवन के साथ इसे सहज रूप से जोड़ सकें।
इस पहल का प्रोडक्शन केंद्र जिला जेल, देहरादून को बनाया गया है, जहां से प्रारंभिक एपिसोड तैयार किए जाएंगे। विशेष बात यह है कि इसमें पूर्व बंदियों का भी सहयोग लिया जा रहा है, जिससे कार्यक्रम अधिक प्रासंगिक और प्रभावी बन सके। यह पहल जेलों में शिक्षा को एक नई दिशा देने के साथ-साथ कैदियों के पुनर्वास और सामाजिक पुनर्संयोजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।