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विकास का आंदोलन चलाने का आया समयः मोदी

Sun, 19 Mar 2017 01:34 AM IST
amarujala.com- Edited by: विक्रान्त सिंह
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि ‘न्यू इंडिया’ सपनों से हकीकत की ओर बढ़ते हुए भारत की परिकल्पना है। यह किसी पर उपकार नहीं है। बल्कि ‘न्यू इंडिया’ का मकसद सबको अवसर और प्रोत्साहन देना है। शनिवार को इंडिया टुडे के एक कार्यक्रम में पीएम ने कहा कि आजादी के आंदोलन की तरह ही विकास का आंदोलन चलाना आज के भारत की मांग है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार देश के समक्ष खड़े मुद्दों को ‘टनल विजन’ से नहीं ‘टोटल विजन’ से देख रही है। 
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उन्होंने कहा, पिछले ढाई साल में सबने केंद्र सरकार की नीति, नीयत और निर्णय देखे हैं। यही न्यू इंडिया की नींव को मजबूत करेगा। हम पारदर्शी तरीके से न्यू इंडिया के रोडमैप पर आगे बढ़ेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज लोग बुराइयों को खत्म करने के लिए साथ आ रहे हैं। पीएम ने कहा कि ‘अनेक दशकों तक हम गलत नीतियों के साथ गलत दिशा में चले। एक सोच प्रभावी होती चली गई कि सब कुछ सरकार करेगी। कई दशकों बाद गलती सामने आई। फिर इसे सुधारने का प्रयास चला। हमने गलतियों में जो सुधार किया उसी को रिफॉर्म मान लिया।’

प्रधानमंत्री ने कहा कि ये सरकार ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ का नारा लेकर चल रही है। उन्होंने कहा कि ‘सबका साथ-सबका विकास’ केवल एक नारा नहीं है, हमारी नीतियों में भी इसका प्रभाव है। ‘मेक इन इंडिया’ का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह भारत की सबसे बड़ी पहल है। आज भारत दुनिया का छठा सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब है। उन्होंने कहा कि निवेश बढ़ाकर ही बदलाव संभव है। सिर्फ सत्ता के गलियारे से ही देश नहीं बदल सकता।
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जीएसटी का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि यह देश बदलने वाला फैसला है। इसे आम सहमति से लिया गया है। जीएसटी से भारत की संघीय व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। प्रधानमंत्री ने ‘स्वच्छ भारत अभियान’ और उज्जवला गैस योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने खासतौर पर लोगों के गैस सब्सिडी छोड़ने के फैसले की सराहना की। उन्होंने अपनी सरकार की विभिन्न योजनाओं और कार्यों की चर्चा की। 

भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ एक हो गया देश
 प्रधानमंत्री ने नोटबंदी के फैसले को लोगों से मिले समर्थन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दीवाली के बाद कालेधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई में जनशक्ति का साथ मिला। जैसे युद्ध के समय देश एक हो जाता है वैसे ही लोग भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ एक हो गए। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जनभावनाओं को समझ नहीं पा रहे हैं। 

सवा सौ करोड़ भारतीय डिसरप्टर-इन-चीफ 
प्रधानमंत्री ने कहा कि चीजें बदल रही हैं। इसका तरीका अलग है। ये व्यवस्थाओं को ध्वस्त करने वाली सोच नहीं है। ये कायाकल्प है, जिससे देश की आत्मा अक्षुण्ण रहे और व्यवस्थाएं समय के अनुकूल होती चलें। यही 21वीं सदी के जनमानस का मन है। इसलिए डिसरप्टर-इन-चीफ अगर कोई है तो सवा सौ करोड़ हिंदुस्तानी हैं। 
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