पीलीभीत टाइगर रिजर्व के पास रहने वाले 30 गांवों में दहशत का छाया हुआ है। तीन महीने में आदमखोर बाघों द्वारा 7 लोगों को मार डाले जाने के बाद इलाके में 'टाइगर कर्फ्यू' जैसे हालात बन गए हैं। डर का आलम ये है कि किसान अब अपने खेतों में जाने से घबराने लगे हैं, सिर्फ दिन के समय रोशनी में झुंड बनाकर खेतों की ओर जाते हैं और साथ में जो भी हथियार हाथ आता है, ले जाते हैं।
आदमखोर बाघों के डर से बच्चों को सुरक्षा और निगरानी में स्कूल भेजा जाता है या घर में ही रखा जा रहा है। इस स्थिति में ग्रामीणों ने वोट डालने से मना कर दिया है। ग्रामीणों ने सरकार से कहा है कि 'वे बाघों से वोट डलवा लें, क्योंकि यहां बाघों का ही राज है।'
28 नवंबर के बाद से 6 लोगों को मार चुके एक बाघ को वन विभाग की टीम ने दवाई के माध्यम से बेहोश कर 11 फरवरी को लखनऊ के चिड़ियाघर भिजवा दिया। हालांकि इसके बाद 16 फरवरी को एक और व्यक्ति मारा गया, लेकिन वन विभाग की टीम ने इस बार बाघ को पकड़ने से मना कर दिया।
जिला वन अधिकारी कैलाश प्रकाश ने कहा, 'इस मामले में मारी गई महिला टाइगर रिजर्व की दीवार फांदकर 300 मीटर अंदर चली गई थी, जहां वह मारी गई। बाघ ने बस्ती के इलाके में प्रवेश नहीं किया।'