मंत्री ने न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि वंदे भारत ट्रेनों की अधिकतम गति 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के लिए अगले तीन से चार साल में रेल पटरियों को अपग्रेड किया जाएगा। उन्होंने बताया, वंदे भारत के तीन प्रारूप हैं। 100 किलोमीटर से कम की यात्रा के लिए वंदे मेट्रो, 100-550 किलोमीटर के लिए वंदे चेयर कार और 550 किलोमीटर से अधिक की यात्रा के लिए वंदे स्लीपर।
उत्तराखंड के देहरादून से दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनल रेलवे स्टेशन तक वंदे भारत ट्रेन की शुरुआत के बाद वैष्णव ने कहा, 'ये तीनों प्रारूप फरवरी-मार्च (अगले साल) तक तैयार हो जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली-देहरादून वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई।
यात्रियों के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस उत्तराखंड के लिए इस तरह की पहली ट्रेन राज्य की राजधानी और राष्ट्रीय राजधानी के बीच यात्रा के समय को देहरादून-नई दिल्ली रेलवे स्टेशन शताब्दी एक्सप्रेस में लगने वाले छह घंटे और 10 मिनट से घटाकर साढ़े चार घंटे कर देती है।
वैष्णव ने कहा कि हर राज्य को जून के मध्य तक वंदे भारत ट्रेन मिल जाएगी। मंत्री ने कहा कि इन ट्रेनों के उत्पादन में तेजी लाई जा रही है। उन्होंने कहा, हर आठवें या नौवें दिन कारखाने से एक नई ट्रेन निकल रही है। दो और फैक्ट्रियों में काम शुरू होने जा रहा है। इन कारखानों की आपूर्ति श्रृंखला स्थिर होने के बाद हमारे पास एक नई ट्रेन आएगी।
वंदे भारत ट्रेनों को 160 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति के साथ डिजाइन किया गया है, लेकिन वे ट्रैक क्षमता के अनुसार 130 किमी प्रति घंटे तक की गति से चलेंगी। पुराने ट्रैक को 70 से 80 किमी प्रति घंटे के बीच की गति का समर्थन करने के लिए डिज़ाइन किया गया था। लगभग 25,000-35,000 किलोमीटर पटरियों को 110 किमी प्रति घंटे, 130 किमी प्रति घंटे और 160 किमी प्रति घंटे की गति का समर्थन करने के लिए अपग्रेड किया जा रहा है। यह अगले तीन से चार साल में हो जाएगा।
मंत्री ने कहा कि रेलवे सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए रेल संपर्क परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रहा है। ट्रेन यात्रियों को 4जी-5जी सेवाएं मुहैया कराने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्री ने कहा कि रेलवे द्वारा तेजी से 4जी-5जी टावर लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर उन्हें स्थापित किया गया है और काम लगातार चल रहा है।