फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Amur Falcon: बिना रुके छह दिन में भारत से केन्या पहुंचे तीन फाल्कन, पूरा किया छह हजार किमी तक का कठिन मार्ग

सार

Amur Falcon Eagle: लगातार छह दिनों तक ये डिवाइस उनकी हर गतिविधि को सैटेलाइट के जरिये रिकॉर्ड करते रहे। इन्हें टैग करने का उद्देश्य ये समझना था कि अमूर फाल्कन आखिर किन रास्तों से गुजरते, कितनी ऊंचाई पर उड़ते और कब-कब आराम करते हैं
विज्ञापन
अमूर फाल्कन बाज - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत से केन्या पहुंचे तीन बाज ने बिना रुके 6 हजार किलोमीटर तक का सफर तय किया है। मणिपुर के तामेंगलोंग जिले से टैग किए गए 150 ग्राम वजनी तीन अमूर फाल्कन ने महाद्वीप, समुंद्र और लगातार बिना रुके घंटों की उड़ान भरी। मणिपुर के तामेंगलोंग में शोधकर्ताओं ने अपापंग, आहू और अलांग नाम के तीन पक्षियों को 3.5 ग्राम के बेहद हल्के ट्रांसमीटर के साथ टैग किया।
विज्ञापन


लगातार छह दिनों तक ये डिवाइस उनकी हर गतिविधि को सैटेलाइट के जरिये रिकॉर्ड करते रहे। इन्हें टैग करने का उद्देश्य ये समझना था कि अमूर फाल्कन आखिर किन रास्तों से गुजरते, कितनी ऊंचाई पर उड़ते और कब-कब आराम करते हैं। तीनों पक्षियों की यात्रा का सबसे कठिन हिस्सा अरब सागर था। जहां इंसान जहाज के साथ भी जाने से डरता है। लेकिन छोटे मगर मजबूत पंक्षी वहां बिना किसी रुकावट के उड़ते चले गए। पहले पंक्षी अपापंग लंबी उड़ान के बाद केन्या पहुंचा।

वहीं, आहू ने सोमालिया में सुरक्षित लैंडिंग की और अलांग ने भी उसी मुश्किल रास्ते को चुनकर सफलतापूर्वक समुंद्र पार किया। इनकी इस यात्रा की खास बात यह है कि तीनों ने 3,000 किलोमीटर से भी लंबे खुले समुंद्र को एक ही बार में पार कर लिया। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह किसी भी पक्षी के लिए दुनिया की सबसे कठिन माइग्रेशन फ्लाइट्स में से एक है। 
विज्ञापन


इसलिए अहम है अमूर फाल्कन का सफर
अमूर फाल्कन हर साल पूर्वोत्तर भारत में रुकते हैं और यहां भरपूर खाना खाकर ताकत जुटाते हैं। इसी ऊर्जा की बदौलत वे समुद्र के ऊपर की लंबी, बिना रुके उड़ान भरते हैं। मणिपुर में पिछले कुछ साल में शिकार पर लगाम लगी है और स्थानीय समुदाय भी इन पक्षियों की सुरक्षा में आगे आए हैं। इसी वजह से इनका प्रवासन पहले की तुलना में अब ज्यादा सुरक्षित हुआ है।

अरब सागर में गहरे समुद्र के ऑक्टोपस स्किवड की नई प्रजाति की खोज
आईसीएआर और केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीएमएफआरआई) के वैज्ञानिकों ने अरब सागर में गहरे समुद्र के ऑक्टोपस स्क्विड (अष्टबाहु) की एक नई प्रजाति की खोज की है। यह खोज विश्व स्तर पर दुर्लभ माने जाने वाले टैनिंगिया वंश की दूसरी प्रजाति है। सीएमएफआरआई ने शुक्रवार को बताया बताया कि इस प्रजाति का वैज्ञानिक नाम टैनिंगिया सिलासी (इंडियन ऑक्टोपस स्क्विड) रखा गया है। इसका औपचारिक विवरण अंतरराष्ट्रीय जर्नल मरीन बायोडायवर्सिटी में प्रकाशित किया गया है।

ये भी पढ़ें: खतरनाक और जहरीले सापों को भी खा जाते हैं ये पक्षी, पलक झपकते ही कर लेते हैं शिकार
विज्ञापन


उन्होंने बताया कि यह नमूना कोल्लम तट से करीब 390 मीटर की गहराई से एकत्र किया गया था। इसकी लंबाई 45 सेमी है। यह स्क्विड ऑक्टोपोटेथिडे परिवार से संबंधित है। इस परिवार के वयस्क सदस्यों की खासियत यह है कि उनमें टेंटेकल्स (तम्बू) नहीं होते हैं। इस शोध का नेतृत्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ गीता शशिकुमार और तकनीकी अधिकारी डॉ साजीकुमार केके ने किया। डॉ गीता ने बताया कि वे एक दशक से अधिक समय से अरब सागर में सिफालोपोड्स का अध्ययन कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने इस ऑक्टोपस स्क्विड का को पहले कही नहीं देखा था। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें