आर्मी की ओर से मुंबई में तीन बड़े रेलवे ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है और खास बात है कि इनके लिए इस्तेमाल होने वाला मटिरियल बॉर्डर के विवादित क्षेत्र दोकलम से लाया जा रहा है। दोकलम पर चीन और भारत के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है और भारतीय सेना वहां इस्तेमाल करने वाले पत्थरों को इन पुलों पर भी लगा रही है।
जिन पुलों के लिए दोकलम से मटीरियल मंगवाया गया है, उनमें एलफिंस्टन रोड-परेल, कर्री रोड और अंबिवली स्टेशन शामिल हैं। सेना ने शनिवार को नए ओवर-पुल के लिए दो कड़ी लॉन्च की जो कि एलफिंस्टन रोड और परेल रेलवे स्टेशनों को लिंक करेंगी। पहला, 40 मीटर लंबी गर्डर 350 टन की क्रेन की मदद से बॉम्बे सपर्स द्वारा लॉन्च किया गया था।
बताया जा रहा है कि इनमें से दो पुल एलफिंस्टन रोड-परेल और कर्री रोड को 15 फरवरी तक लोगों के लिए खोला जा सकता है। आर्मी के हाथों बन रहे पुलों की खासियत यह है कि ये करीब 8 टन का वजन झेल सकते हैं, क्योंकि इन्हें हैवी मटीरियल से तैयार किया जा रहा है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की जानकारी के मुताबिक बॉम्बे इंजीनियरिंग ग्रुप एंड सेंटर के अधिकारी का कहना है कि ये पुल 1993 से लेह में बने पुल की तरह ही मजबूत होंगे। लेह में बना पुल 6 महीने तक बर्फ से ढके रहने के बावजूद आज तक मजबूत है। दरअसल, इन पुलों के निर्माण का चलन दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकारों के हाथों शुरू हुआ था।
पुलों के जल्द निर्माण की वजह से एलफिंस्टन रोड-परेल पर करीब 8 करोड़ रुपये का खर्चा आ रहा है और इसकी लागत सामान्य से 30-40 फीसदी ज्यादा पड़ रही है।