जीएसटी विभाग के अधिकारियों ने फर्जी बिल बनाने वाले दो गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। ये गिरोह फर्जी तरीके से 557 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दावा करने में शामिल 246 मुखौटा/फर्जी कंपनियों से जुड़े हैं।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीआई) की मेरठ क्षेत्रीय इकाई ने फर्जी बिल बनाने वाले दोनों गिरोह का खुलासा किया है, जिनके मास्टरमाइंड आनंद कुमार और अजय कुमार हैं। इन दोनों गिरोह ने 246 फर्जी फर्मों के जरिये 1,500 से अधिक लाभार्थी कंपनियों को 3,142 करोड़ रुपये के करयोग्य करोबार वाले चालान जारी किए हैं। इसमें 557 करोड़ रुपये का आईटीसी भी शामिल है। जांच के दौरान ऐसी ही एक लाभार्थी फर्म के मालिक विक्रम जैन को भी पकड़ा गया है। तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर 26 जुलाई को मेरठ की आर्थिक अपराध अदालत में पेश किया गया। उन्हें आठ अगस्त तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इन दोनों में से एक गिरोह का जून में नोएडा पुलिस की ओर से उजागर की गई फर्जी फर्मों के साथ घनिष्ठ संबंध था।
जाली स्टांप और चेकबुक बरामद
दोनों मास्टरमाइंड के दिल्ली के अध्यापक नगर और पश्चिमपुरी स्थित गुप्त कार्यालयों से फर्जी फर्मों से संबंधित कई दस्तावेज बरामद किए हैं। इनमें जाली स्टांप, डेबिट/क्रेडिट कार्ड, चेकबुक, आधार कार्ड और पैन कार्ड शामिल हैं। इसके अलावा, उनके लैपटॉप और मोबाइल फोन की जांच की जा रही है, ताकि उनकी ओर से जारी किए गए फर्जी बहीखाता, चालान, ई-वे बिल को वापस जुटाया जा सके। इसके अलावा, फर्जी जीएसटी बिल और अवैध नकदी प्रवाह के लेनदेन से जुड़ी वॉट्सएप चैट/वॉयस संदेश भी मिले हैं।
26 राज्यों में फैला है जाल
मंत्रालय ने बताया कि दोनों गिरोह का जाल 26 राज्यों में फैला हुआ। फर्जीवाड़े से लाभान्वित कंपनियों में से अधिकतर दिल्ली की हैं। मंत्रालय ने कहा कि फर्जी खाते खोलने में बैंक अधिकारियों की भी संलिप्तता है। दोनों मास्टरमाइंडों की ब्रोकरों/एजेंटों के साथ घनिष्ठ सांठगांठ है। ये ब्रोकर/एजेंट छोटे मौद्रिक लाभ के बदले गरीब, जरूरतमंद और अतिसंवेदनशील लोगों की आईडी पाने में माहिर हैं।