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बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: दाभोलकर के बेटे-पत्रकारों के खिलाफ मानहानि का केस कोल्हापुर ट्रांसफर, जानें वजह

Thu, 04 Sep 2025 03:36 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

Bombay High Court: बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के बाद मानहानि के सभी मुकदमे अब गोवा के पोंडा कोर्ट से हटकर कोल्हापुर की अदालत में सुनवाई के लिए जाएंगे। कोर्ट का मानना है कि इससे न सिर्फ अभियुक्तों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी बल्कि न्याय की प्रक्रिया भी निष्पक्ष तरीके से पूरी हो सकेगी।
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बॉम्बे हाई कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि तर्कवादी नेता नरेंद्र दाभोलकर के बेटे हमीद दाभोलकर और कुछ पत्रकारों को गोवा में मौजूद दक्षिणपंथी संगठन सनातन संस्था से जान का खतरा होने की आशंका 'वाजिब और असली' लगती है। इसी आधार पर कोर्ट ने गोवा के पोंडा कोर्ट में चल रहे मानहानि के मुकदमों को महाराष्ट्र की अदालत में ट्रांसफर कर दिया है।
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क्या है पूरा मामला?
सनातन संस्था ने साल 2017 और 2018 में हमीद दाभोलकर और कई पत्रकारों, जिनमें वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले भी शामिल हैं, के खिलाफ मानहानि के मुकदमे दर्ज कराए थे। आरोप था कि उन्होंने संस्था के खिलाफ झूठे और मानहानिकारक बयान दिए और प्रकाशित किए, जिससे उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। ये सभी मुकदमे गोवा के पोंडा कोर्ट में दर्ज किए गए थे, जहां संस्था का मुख्यालय मौजूद है। हमीद दाभोलकर और पत्रकारों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग की थी कि इन मुकदमों को गोवा से किसी अन्य जगह, खासकर महाराष्ट्र की अदालत में ट्रांसफर किया जाए। उनका कहना था कि गोवा में संस्था का गहरा प्रभाव है और वहां सुनवाई के दौरान उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है।
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मुकदमा चलने पर जान का खतरा
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में कहा कि अगर मुकदमे की सुनवाई गोवा में होती है, तो उनके साथ भी वही हो सकता है जो नरेंद्र दाभोलकर और अन्य विचारकों, गोविंद पानसरे, प्रोफेसर एम. एम. कलबुर्गी और पत्रकार गौरी लंकेश, के साथ हुआ था। इन चारों की अलग-अलग घटनाओं में हत्या कर दी गई थी। सभी लोग अंधविश्वास और कट्टरपंथ के खिलाफ आवाज उठाते थे।

बॉम्बे हाईकोर्ट की टिप्पणी
जस्टिस एनजे जमदार ने 3 सितंबर को दिए अपने आदेश (जो 4 सितंबर को सार्वजनिक हुआ) में कहा कि, 'यदि सनातन संस्था और याचिकाकर्ताओं के बीच की दुश्मनी और टकराव को देखा जाए, तो उनकी आशंका वाजिब और वास्तविक लगती है। न्याय की दृष्टि से सही यही होगा कि ये मुकदमे गोवा से महाराष्ट्र की अदालत में ट्रांसफर किए जाएं।' कोर्ट ने इन मामलों को महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले की अदालत में ट्रांसफर करने का आदेश दिया। हालांकि, संस्था की मांग पर कोर्ट ने 6 हफ्ते के लिए आदेश पर रोक (स्टे) भी दे दी है।

दाभोलकर हत्या केस का जिक्र
कोर्ट ने अपने आदेश में नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड का जिक्र किया। 2024 में पुणे की सेशन कोर्ट ने दो दोषियों को सजा सुनाई थी। उस फैसले में यह भी सामने आया था कि सनातन संस्था और कुछ अन्य दक्षिणपंथी संगठनों ने दाभोलकर की अंधविश्वास विरोधी मुहिम का कड़ा विरोध किया था। गवाहों ने यह साबित किया कि दोषियों का संबंध सनातन संस्था से था। हालांकि, सीबीआई अब तक हत्या के असली मास्टरमाइंड का पता नहीं लगा पाई है। जस्टिस जमदार ने कहा कि सेशन कोर्ट की ये टिप्पणियां इतनी गंभीर हैं कि हमीद दाभोलकर और पत्रकारों के मन में भय होना स्वाभाविक है। 
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हमीद दाभोलकर और अन्य हत्याओं का संदर्भ
हमीद दाभोलकर इस हत्याकांड में अभियोग पक्ष गवाह रह चुके हैं और आज भी सनातन संस्था की विचारधारा के आलोचक हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि पानसरे, कलबुर्गी और गौरी लंकेश जैसी शख्सियतों की हत्या का सिलसिला इस मामले की गंभीरता को और बढ़ा देता है।
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