जम्मू कश्मीर में घुसपैठ के प्रयास को नाकाम करने के अभियान के दौरान शहीद हुए मेजर कौस्तुभ राणे को आज हजारों लोगों ने अश्रुपूर्ण अंतिम विदाई दी। मेजर राणे का दिन में साढे बारह बजे जिले के मीरा रोड टाउनशिप के श्मशान घाट में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
शहीद मेजर के अंतिम दर्शन के लिए सुबह मीरा रोड के शीतल नगर क्षेत्र में राणे के घर पर बड़ी संख्या में लोग उपस्थित हुए। सुबह करीब साढे नौ बजे मेजर के घर से उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई। उनके शव को एक ताबूत में रखा गया जिस पर तिरंगा लिपटा हुआ था। यह ताबूत फूलों से सजे ट्रक में रखा था। कुछ चौराहों पर इस वाहन पर पुष्प वर्षा भी की गई।
दो घंटे बाद जब अंतिम यात्रा श्मशान घाट पहुंची तो लोगों की भारी भीड़ के चलते कुछ समय के लिए अव्यवस्था फैल गई। लोग अंतिम संस्कार देखने के लिए पेड़ों पर चढ़ गये, पास की इमारतों की छत पर चढ गये। राणे के परिवार को लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करनी पड़ी। शहीद मेजर की पत्नी कणिका अपने ढाई साल के बेटे अगस्त्य को गोद में ली हुई थीं।
शहीद की पत्नी का रो रोकर बुरा हाल था। शहीद के बेटे द्वारा चिता को मुखाग्नि देने से पहले 21 तोपों की सलामी दी गई। गौरतलब है कि उत्तरी कश्मीर के गुरेज सेक्टर में घुसपैठ का प्रयास नाकाम करते वक्त मेजर राणे तथा तीन सैनिक शहीद हो गये थे।