रेलवे इन दिनों हाइटेक ट्रैक पर पूरी रफ्तार से दौड़ रही है। लेकिन जिन लोगों के पास स्मार्ट फोन नहीं है, जो सोशल नेटवर्किंग साइट से अनभिज्ञ है, मोबाइल तक नहीं है। वो अपनी शिकायत कहां दर्ज कराए? उन्हें सुविधा कैसे मिले के सवाल पर केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु का कहना है कि हमारे देश में 90 फीसदी यात्रियों के पास मोबाइल है। 10 प्रतिशत लोग ऐसे लोग जो सोशल साइट व मोबाइल पर नहीं हैं वे लेग अभी पालने में। यानि अभी छोटे है, बच्चे है। पूर्वांचल की तरफ यात्रा करने वाले यात्रियों को कंफर्म बर्थ नहीं मिलने, ट्रेनों के टाइम टेबल पर नहीं चलने सहित कई मुद्दों पर अमर उजाला से बातचीत हुई। पेश है केंद्रीय रेल मंत्री से हुई बातचीत के कुछ अंश।
सवाल-सभी को कंफर्म टिकट देना बड़ी चुनौती है, मांग के अनुसार आपूर्ति नहीं होती, इसका निदान कैसे करेंगे?
जवाब-रेलवे का फोकस इसपर है। रेलवे ट्रैक का दोहरीकरण, तिहरीकरण किया जा रहा है। जहां जरूरत पड़ेगी वहां एलिवेटेड कॉरीडोर भी तैयार किया जाएगा। सभी ट्रेनों में दो-दो अतिरिक्त दीनदयालु कोच जोड़े जाएंगे।
सवाल-प्रभु की चुनौती क्या है?
जवाब-रेलवे जर्नी ऑफ चैलेंज है। पारदर्शिता रखना, सुरक्षित सफर कराना, राज्यों के साथ तालमेल बिठाना, कई तरह की चुनौतियां है। यह सिर्फ मेरी चुनौती नहीं है यह देश की भी चुनौती है, देश के लिए काम करना अच्छा लगता है। जिस तरह से सैनिक वर्दी पहनकर देश की सेवा करते है उसी तरह रेलवे कर्मी बिना वर्दी के दिनभर मेहनत करके सेवा करते है।
सवाल-आम लोगों का सफर कब तक बेहतर हो सकेगा?
जवाब-जो लोग सफर करने में कामयाब नहीं रहते उनके लिए अंत्योदय ट्रेन चलेगी। इसके साथ ही हमसफर, तेजस, उदय ट्रेन अगले दो-तीन महीने में दौड़ेगी। इन ट्रेनों के चलने से सभी का सफर सुहाना होगा। 2019 तक सभी को कंफर्म बर्थ दिलाने का लक्ष्य रखा गया है।