रमजान के महीने के बाद इस्लाम में आस्था रखने वाले लोग ईद मनाएंगे। इस साल की ईद 31 मार्च या एक अप्रैल को संभावित है। चांद दिखने के आधार पर तारीख का फैसला होगा। इसी बीच भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चे ने बड़ा फैसला लिया है। पार्टी ने तय किया है कि 32 लाख जरूरतमंद लोगों के बीच सौगात-ए-मोदी किट बांटी जाएगी। जानिए क्या है यह फैसला
भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा ने 'सौगात-ए-मोदी' अभियान शुरू किया है। पार्टी ने आगामी दिनों में ईद के दौरान 32 लाख गरीब मुस्लिम परिवारों तक पहुंचने की योजना बनाई है। बता दें कि ईद मार्च के अंतिम दिन या अप्रैल में मनाई जाएगी। भाजपा ने जिला स्तर पर ईद मिलन समारोह आयोजित करने का फैसला भी लिया है।
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जरूरतमंद परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश
भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा ने पार्टी से मुसलमानों को जोड़ने के लिए ईद से पहले रविवार को सौगात-ए-मोदी अभियान शुरू किया। मोर्चा इस अभियान के जरिये पूरे देश में 32 लाख गरीब मुस्लिम परिवारों से संपर्क कर उसे ईद मनाने के लिए जरूरी सामान उपलब्ध कराएगा। मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी ने अभियान का एलान करते हुए मोर्चा के प्रदेश अध्यक्षों और अन्य पदाधिकारियों को जिला स्तर पर ईद मिलन समारोह आयोजित करने और जरूरतमंद परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
इन परिवारों के बीच सौगात-ए-मोदी किट बांटेगी भाजपा
सिद्दीकी ने कहा कि मोर्चा के 32,000 पदाधिकारी 32,000 मस्जिदों से संपर्क कर 32 लाख जरूरतमंद व्यक्तियों की पहचान करेंगे और उन्हें सहायता प्रदान करेंगे। उन्हें ईद मनाने में कोई परेशानी न हो, इसका ख्याल रखेंगे और उन्हें ईद मनाने के लिए जरूरी सामान उपलब्ध कराएंगे। ऐसे परिवारों को सौगात-ए-मोदी किट दिया जाएगा।
दावा- मोदी सरकार की नीति का सबसे अधिक लाभ मुसलमान बिरादरी को मिला
सिद्दीकी ने कहा कि मोदी सरकार सबका साथ, सबका विकास की नीति पर चलती है। इस नीति का सबसे अधिक लाभ मुसलमान बिरादरी को मिला है। देश के मुसलमान गरीब हैं, ऐसे में मोदी सरकार की गरीबों पर केंद्रित सभी योजनाओं का सर्वाधिक लाभ इस समुदाय को मिला है।
दूसरे अल्पसंख्यकों के त्योहारों पर भी मोर्चा रहेगा सक्रिय
सिद्दीकी ने कहा कि यह अभियान सिर्फ अल्पसंख्यक मुसलमानों तक केंद्रित नहीं रहेगा। आने वाले समय में गुड फ्राइडे, नवरोज जैसे अल्पसंख्यकों के त्योहारों पर भी मोर्चा इसी तरह का अभियान चलाएगा, जिससे मुख्य पर्व मनाने में इन समुदायों के गरीब लोगों को आर्थिक परेशानी न हो।