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इस वर्ष डेंगू से ज्यादा चिकनगुनिया का है खतरा

Thu, 25 Aug 2016 05:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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डेंगू, मच्छर - फोटो : file photo
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इस वर्ष डेंगू से ज्यादा चिकनगुनिया का खतरा है और इससे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय बेहद चिंतित है। मामले की गंभीरता को देखते हुए बुधवार को केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों और स्थानीय निकाय की बैठक बुलाई और इन दोनों बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए सख्ती से काम करने के निर्देश दिए हैं।
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केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव सी.के.मिश्रा ने बताया कि इन बीमारियों की सही रिपोर्टिंग भी नहीं हो रही है लिहाजा सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को निर्देश दिया गया है कि हर हाल में प्रति दिन डेंगू और चिकनगुनिया के मरीजों की सूचना देनी होगी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष दिल्ली में डेंगू से ज्यादा चिकनगुनिया का प्रकोप है। अभी तक 600 से अधिक चिकनगुनिया के पंजीकृत किएी जा चुके हैं। 

दिल्ली में इस वर्ष डेंगू का टाईप थ्री स्ट्रेन सक्रिय है जो खतरनाक होता है। जबकि पश्चिम बंगाल में डेंगू का टाईप टू सक्रिय है। डेंगू के इस स्ट्रेन से ज्यादा मरीजों की मौत होती है। डेंगू से सबसे ज्यादा मौत इस वर्ष अभी तक पश्चिम बंगाल में रिकार्ड की गई है। हालांकि कर्नाटक और केरल में भी डेंगू सक्रिय है। 
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मरीजों से फिडबैक लेकर अस्पतालों में सुधार की तैयारी

डेंगू वार्ड - फोटो : अमर उजाला
केन्द्र सरकार की ओर से एक योजना की शुरुआत की जा रही है, जिसमें मरीजों से फिडबैक लेकर अस्पतालों में सुधार किया जाएगा। अस्पताल में इलाज कराने वाले मरीजों से फोन पर पूछा जाएगा कि अस्पताल में इलाज के दौरान उनको क्या परेशानी हुई और किस तरह की सुधार वो चाहते हैं। मरीजों से मिले फिडबैक के आधार पर अस्पतालों में सुधार लाया जाएगा। इस योजना में अब तक 79 अस्पताल शामिल हो चुके हैं। फिलहाल जिला अस्पतालों और सुपर स्पेशयलिटी अस्पतालों को इस योजना से जोडने की तैयारी है। 

बेहतर प्रदर्शन करने वाले अस्पतालों को किया जाएगा सम्मानित 
स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि मरीजों की सुख-सुविधाओं और इलाज के मामले में बेहतर प्रदर्शन करने वाले अस्पतालों को सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है। बेहतर प्रदर्शन का आकलन ओपीडी और भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या, ट्यूबरक्लोसिस बीमारी के नियंत्रण पर किए गए काम और यह भी देखा जाएगा कि किस राज्य में पॉकेट से ज्यादा बीमारी पर खर्च करने वाले लोगों की संख्या में कमी आई है। 
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