डॉक्टर श्रीनिवास राजकुमार के मुताबिक, लेकिन यही तरीका भारत में कारगर नहीं हो सकता है। यहां आबादी बहुत ज्यादा है, लेकिन लोगों के घर बहुत छोटे हैं। यहां घरों में भी अलग-थलग रहना बहुत मुश्किल होता है।
जो लोग एक-दो कमरों के घरों में ही रहते हैं और सबके लिए एक ही टॉयलेट इस्तेमाल करते हैं, वहां यह तरीका कोरोना को और अधिक फैलाने वाला साबित होगा।
उन्होंने कहा कि यह अमेरिकी-यूरोपीय मॉडल अपनाने की बजाय सरकार को भारतीय परिस्थितियों को समझते हुए अपना तरीका विकसित करना चाहिए। अन्यथा यह देश में कोरोना को और अधिक फैलाने वाला कदम साबित हो सकता है।
वहीं, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. राजन शर्मा ने अमर उजाला को बताया कि सरकार का यह फैसला बिल्कुल सही है। सामान्य मामलों में इलाज की बहुत अधिक आवश्यकता नहीं होती।
ऐसे लोगों को ज्यादा आरामदेह परिस्थितियों में उनके घरों में ही रखा जा सकता है। इसके लिए उन्हें प्रशिक्षित कर उन्हें ज्यादा स्वस्थ तरीके से अलग-थलग रहने और अपने इस्तेमाल की चीजों को दूसरों तक न पहुंचने को आश्वस्त करना होगा।
हालांकि मजदूर या गरीब लोगों को जिनके पास अलग-थलग रहने की व्यवस्था नहीं है, उन्हें आइसोलेशन सेंटरों में रखा जा सकता है।
बीएलके अस्पताल के डॉक्टर संदीप नायर का कहना है कि कोविड के मामलों में हम अभी तक लड़ने का तरीका ही सीख रहे हैं। अब तक हजारों लोगों को क्वारंटीन में रखा गया। लेकिन अब अनुभवों से पता चल रहा है कि सामान्य मामलों में बहुत ज्यादा गंभीर इलाज की जरूरत नहीं होती।
उन्हें केवल अलग-थलग रखना होता है। बड़े क्वारंटीन सेंटर्स में ज्यादा देखभाल संभव नहीं है। वे ज्यादा आरामदेह भी नहीं हो सकते। ऐसे में अगर लोगों को उनके घरों में ही रखकर चिकित्सा की जाती है तो इसमें कोई बुराई नहीं है।
वहीं, एक अन्य वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि यह संभव है कि मई के अंत और जून के महीने में कोरोना के मामलों में बहुत ज्यादा तेजी आए। अगर ज्यादा गंभीर लक्षण वाले मरीज सामने आते हैं तो लोगों को अस्पतालों में भर्ती करना बेहद आवश्यक होगा।
अगर अस्पताल पहले से ही कम गंभीर लक्षण वाले लोगों से भरे रहेंगे, तो गंभीर लोगों को इलाज देना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में इस रणनीति को भविष्य की तैयारी के रुप में भी देखा जा सकता है।
हालांकि, अभी तक के आंकड़े दिखाते हैं कि भारत में कोरोना से स्वस्थ होने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अब लगभग 30 फीसदी लोग स्वस्थ होकर अपने घरों को जा रहे हैं जबकि इस बीमारी से केवल 3.3 फीसदी के करीब लोगों की मौत हो रही है।
भारत में अभी तक 39834 केस हैं जबकि 17846 लोग स्वस्थ होकर अपने घर जा चुके हैं। भारत में कोरोना के कारण अब तक कुल 1981 लोगों की मौत हुई है। वहीं, दिल्ली में कुल केसों की संख्या 6318 हो गई है। इसमें 2020 लोग स्वस्थ हुए हैं जबकि 68 लोगों की जान चली गई है।