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लद्दाख में चीन की दादागीरी, इसलिए भारत से टकरा रहा है ड्रैगन

Wed, 16 Aug 2017 11:28 AM IST
amarujala.com- Written by: अभिषेक मिश्रा
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भारत और चीन
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मंगलवार को भारत आजादी के जश्न में डूबा हुआ था और चीन गंदे इरादे लिए सीमा पर घुसपैठ की ताक में बैठा था। जैसी ही देश में स्वतंत्रता दिवस का जश्न शुरू हुआ, उसी वक्त चीनी सैनिकों ने भारतीय सीमा में घुसपैठ की कोशिश की। पीएलए ने लद्दाख की मशहूर पानगोंग झील के किनारे भारतीय क्षेत्र में घुसने की कोशिश, जिसके बाद भारतीय सैनिकों ने चीनी सैनिकों की कोशिश को नाकाम कर दिया। 
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पढ़ें: हिंद महासागर पर चीनी नौसेना की नजर, कहा- हमारे बड़े हथियार सिर्फ खिलौने नहीं

भारतीय सैनिकों द्वारा रोके जाने के बाद चीनी सैनिकों ने पथराव किया, जिसका भारतीय सौनिकों ने उसी की भाषा में जवाब दिया और सीमा से बाहर खदेड़ दिया। हालांकि, दोनों ओर से की गई पत्थरबाजी में सैनिकों को मामूली चोटें आई हैं। 

अधिकारियों ने बताया कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सैनिकों ने सुबह छह बजे से नौ बजे के बीच दो इलाकों- फिंगर-4 और फिंगर-5 में भारतीय सीमा में घुसने का दो बार प्रयास किया। लेकिन इन दोनों मौकों पर भारतीय जवानों ने उनके प्रयासों को नाकाम कर दिया। 
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इस मामले में विशेषज्ञों का कहना है कि चीन ये सब कुछ जानबूझकर कर रहा है। 

1. दरअसल, चीन भारत पर पहले हमला नहीं करना चाहता है। इसलिए वह भारत के खिलाफ छद्म युद्ध छेड़ रहा है। वह भारत को उकसाना चाहता है। 

2.  साथ ही चीनी सैनिकों द्वारा की गई पत्थरबाजी की हरकत असामान्य है। माना जा रहा है कि चीन ये चाल भारत को भड़काने के लिए चल रहा है। 

3. विशेषज्ञों का मानना है कि चीन यह सब कुछ भारत के साथ चल रहे डोकलाम सीमा विवाद के चलते कर रहा है। डोकलाम विवाद को लेकर चीन बार-बार भारतीय सीमा में घुसपैठ की कोशिश कर रहा है। इससे पहले चीन ने उत्तराखंड में भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश की थी। 

4. जानकार बताते है कि सीमा पर सैनिकों का आमने सामने आना सामान्य बात है। लेकिन जिस तरह ही हरकत चीन कर रहा है, इसे सामान्य घटना के तौर पर नहीं देखा जा सकता। 

5. कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि भारत, चीन के ओआरओबी प्रोजेक्ट का विरोध करता आ रहा है। भारत को ओआरओबी प्रोजेक्ट के लिए तैयार करने के लिए चीन भारत पर दबाव बनाना चाहता है, इसलिए वह ऐसे कदम उठा रहा है। 
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डोकलाम विवाद के बाद लद्दाख में चीन ने की घुसपैठ की कोशिश

गौरतलब है कि जब चीनी सैनिकों ने पाया कि उनके सामने भारतीय सैनिक मानव श्रृंखला बनाकर खड़े हैं तो उन्होंने पत्थर फेंकना शुरू कर दिया जिसके बाद भारतीय जवानों ने तत्काल जवाब देते हुए पथराव किया।

इस घटना में दोनों तरफ के लोगों को मामूली चोटें आईं और रस्मी ‘बैनर ड्रिल’ के बाद स्थिति को नियंत्रण में लाया गया। बैनर ड्रिल के तहत दोनों पक्ष अपने स्थान पर जाने से पहले बैनर दिखाते हैं। नयी दिल्ली में सेना के एक प्रवक्ता ने इस घटना पर टिप्पणी करने से इनकार किया।

यह घटना उस वक्त हुई है जब सिक्किम सेक्टर में डोकलाम में दोनों देशों के बीच गतिरोध बना हुआ है। चीनी सैनिक फिंग फोर इलाके में घुसने में कामयाब हो गए थे जहां से उनको वापस भेजा गया। यह इलाका दोनों देशों के बीच गतिरोध का केंद्र रहा है क्योंकि दोनों इसे अपने क्षेत्र का हिस्सा बताते हैं।

अधिकारियों ने कहा कि भारतीय पक्ष ने 1990 के दशक के आखिर में हुई बातचीत के दौरान जब इस इलाके पर दावा किया था तब चीनी सेना ने मेटल-टॉप रोड का निर्माण किया था और इस बात पर जोर दिया था कि यह अक्साई चीन का हिस्सा है।

चीन ने फिंगर फोर तक सड़क का निर्माण कराया था जो सिरी जाप इलाके में आता है और वास्तविक नियंत्रण रेखा से पांच किलोमीटर की दूरी पर है।इससे पहले चीनी सैनिकों की गश्त इस झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारों से बार बार होने लगी थी। इस झील का 45 किलोमीटर का हिस्सा भारतीय क्षेत्र में है और 90 किलोमीटर चीनी क्षेत्र में है।
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