रमजान का चांद दिखने के साथ मुकद्दस रमजान इस बार 26 या 27 मई से शुरू होगा। ऐसे में 24 या 25 रोजे इस बार जून की तपिश में बीतेंगे। बुजुर्गों की माने तो ऐसा 34 साल बाद होने जा रहा है। इससे पहले 1983 में लोगों ने जून में रोजे रखे थे।
मदरसा अध्यापक मोहम्मद आजम ने बताया कि मई माह के पांच या छह दिन छोड़कर बाकी रोजे जून में रखे जाएंगे। संभावना जताई जा रही है कि रमजानुल मुबारक का चांद 26 नहीं तो 27 मई को निकलेगा। चांद दिखने की तस्दीक होने के साथ ही मुबारक माह शुरू हो जाएगा।
ऐसा मौका 34 वर्षों बाद आएगा, जब मुस्लिम सबसे गर्म महीने में खुदा की इबादत में मशगूल होंगे। 1983 में जून में पूरा रमजान बीता था। बुजुर्गों के मुताबिक इससे पहले 1949 में जून में रोजे पड़े थे। इस बार जून के अंतिम तीन रोजे सबसे लंबे 15 घंटा 36 मिनट के होंगे।
मौसम के लिहाज से जून में रोजे काफी कठिन साबित होंगे। अब जून में 24 रोजे पड़ेंगे या 25, यह चांद पर निर्भर करेगा। अगर रमजान 27 मई से शुरू हुआ तो आखिरी तीन रोजे में सुबह 3.24 बजे सेहरी और शाम 7.00 बजे इफ्तार होगा। 26 से रमजान शुरू हुआ तो आखिरी दो रोजे की सेहरी और इफ्तार का यही समय होगा।