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High Court: तिरुप्परनकुंद्रम दीप प्रज्वलन मामले में स्तंभ को लेकर आए तीन अलग-अलग दावे, हाई कोर्ट ने जताई चिंता

Tue, 16 Dec 2025 11:39 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर दीप प्रज्वलन से जुड़े मामले में मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने दीपथून को लेकर सामने आए तीन अलग-अलग दावों पर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि वह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का पक्ष भी सुनेगी।
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मद्रास हाईकोर्ट - फोटो : एक्स (ट्विटर)
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विस्तार
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तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर दीप प्रज्वलन से जुड़े विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान उस पत्थर के स्तंभ यानी दीपथून को लेकर सामने आए तीन अलग-अलग दावों पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने साफ कहा कि जब एक ही संरचना को लेकर अलग-अलग पक्ष अलग-अलग दावे कर रहे हैं, तो स्थिति और अधिक स्पष्ट होना जरूरी है।

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यह टिप्पणी जस्टिस जी जयचंद्रन ने उस समय की, जब एकल पीठ के 1 दिसंबर के आदेश के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई चल रही थी। एकल पीठ ने तीन दिसंबर को दरगाह के पास स्थित तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर कार्तिगै दीपम जलाने की अनुमति दी थी। इसी आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अपील दाखिल की गई थी।

स्तंभ को लेकर तीन अलग-अलग दावे
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने दीपथून को लेकर तीन तरह के दावे रखे गए। जस्टिस जयचंद्रन ने कहा कि सरकार की ओर से पहले इसे कभी सर्वे स्टोन बताया गया, तो कभी जैन संरचना कहा गया। अब तीसरा दावा यह है कि यह वक्फ संपत्ति का हिस्सा है। अदालत ने कहा कि ऐसे में सच्चाई तक पहुंचने के लिए सभी पहलुओं की गहराई से जांच जरूरी है।
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वक्फ बोर्ड और हिंदू पक्ष की दलीलें
तमिलनाडु वक्फ बोर्ड की ओर से पेश अधिवक्ता अब्दुल मुबीन ने कहा कि मस्जिद और उसके आसपास का पूरा क्षेत्र वक्फ के अधिकार क्षेत्र में आता है और दीपथून भी उसी का हिस्सा है। उन्होंने 1920 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि पहाड़ी तक जाने वाली सीढ़ियां और मंडपम मस्जिद के अंतर्गत आते हैं। वहीं हिंदू श्रद्धालुओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एस श्रीराम ने दलील दी कि यह पहला मामला है, जिसमें एकल पीठ के आदेश को संविधान की शपथ के खिलाफ बताया गया है।

कोर्ट में हंगामा, वकील बाहर निकाले गए
सुनवाई के दौरान कोर्ट हॉल में उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब एक वकील ने अदालत के मना करने के बावजूद जोर-जोर से बोलना जारी रखा। इस पर जस्टिस जयचंद्रन और जस्टिस केके रामकृष्णन की खंडपीठ ने कड़ी नाराजगी जताई। सीआईएसएफ कर्मियों को बुलाकर संबंधित वकील को कोर्ट हॉल से बाहर कराया गया। अदालत ने इस आचरण को गंभीर मानते हुए तमिलनाडु बार काउंसिल को अधिवक्ता अधिनियम के तहत कार्रवाई के लिए मामला संदर्भित किया।
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एएसआई की भूमिका अहम, आज फिर सुनवाई
हाई कोर्ट ने कहा कि वह इस पूरे विवाद पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का पक्ष भी सुनना चाहती है। अदालत का मानना है कि ऐतिहासिक और पुरातात्विक तथ्यों के बिना इस विवाद का स्थायी समाधान संभव नहीं है। इसी वजह से मामले की अगली सुनवाई बुधवार को फिर होगी।

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