, जहाज की नींव 6 अगस्त, 2021 को रखी गई थी। इसको 26 नवंबर, 2022 को लॉन्च किया गया था। इसकी डिलीवरी से पहले बंदरगाह और समुद्र में व्यापक परीक्षण किया गया है। इक्षक की लागत का 80 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा स्वदेशी सामग्री से बना है। बयान में कहा गया है कि इक्षक की आपूर्ति सरकार और भारतीय नौसेना के आत्मनिर्भर भारत के प्रति प्रोत्साहन का एक आश्वासन है।
भारतीय नौसेना को बृहस्पतिवार को चार बड़े सर्वेक्षण पोतों (एसवीएल) में से तीसरा पोत इक्षक मिला। यह युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो की ओर से संचालित 102वां जहाज है। इस श्रेणी का पहला जहाज आईएनएस संध्याक फरवरी 2024 और दूसरा जहाज आईएनएस निर्देशक दिसंबर 2024 में कमीशन किया गया था।
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चार सर्वेक्षण पोत जहाजों के लिए अनुबंध पर अक्टूबर 2018 में हस्ताक्षर किए गए थे। अधिकारियों ने बताया कि इक्षक पहला एसवीएल जहाज है, जिसमें महिला अधिकारियों और नाविकों के लिए आवास की व्यवस्था है। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि जहाज का उद्देश्य बंदरगाह या बंदरगाह के रास्तों के पूर्ण पैमाने पर तटीय और गहरे पानी का सर्वेक्षण और नौवहन चैनलों या मार्गों का निर्धारण करना है। जहाज रक्षा और नागरिक अनुप्रयोगों के लिए समुद्र विज्ञान और भूभौतिकीय डाटा भी एकत्र करेगा।
3,400 टन विस्थापन और 110 मीटर की लंबाई
मंत्रालय ने कहा, इक्षक (यार्ड 3027) गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई), कोलकाता में निर्मित और युद्धपोत निरीक्षण दल (कोलकाता) ने देखरेख किया। एसवीएल जहाजों को गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई), कोलकाता ने भारतीय शिपिंग रजिस्टर के वर्गीकरण नियमों के अनुसार डिजाइन और बनाया है। 3,400 टन विस्थापन और 110 मीटर की लंबाई वाला यह युद्घपोत अत्याधुनिक हाइड्रोग्राफिक उपकरणों से सुसज्जित है। जैसे-डाटा अधिग्रहण और प्रसंस्करण प्रणाली, स्वायत्त पानी के नीचे वाहन, दूर से संचालित वाहन, डीजीपीएस लंबी दूरी की पोजिशनिंग सिस्टम, डिजिटल साइड स्कैन सोनार आदि। डीजीपीएस का मतलब है-डिफरेंशियल जीपीएस। दो डीजल इंजनों से संचालित जहाज 18 समुद्री मील से अधिक की गति प्राप्त कर सकता है।
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26 नवंबर, 2022 को हुआ था लॉन्च
मंत्रालय ने कहा, जहाज की नींव 6 अगस्त, 2021 को रखी गई थी। इसको 26 नवंबर, 2022 को लॉन्च किया गया था। इसकी डिलीवरी से पहले बंदरगाह और समुद्र में व्यापक परीक्षण किया गया है। इक्षक की लागत का 80 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा स्वदेशी सामग्री से बना है। बयान में कहा गया है कि इक्षक की आपूर्ति सरकार और भारतीय नौसेना के आत्मनिर्भर भारत के प्रति प्रोत्साहन का एक आश्वासन है। इसमें कहा गया है कि यह आपूर्ति हिंद महासागर क्षेत्र में राष्ट्र की समुद्री क्षमता को बढ़ाने में बड़ी संख्या में हितधारकों, एमएसएमई और भारतीय उद्योग के सहयोगात्मक प्रयासों के प्रति श्रद्धांजलि है। अत्याधुनिक हाइड्रोग्राफी क्षमता से लैस आईएनएस संध्याक ने हाल में सिंगापुर के राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर सिंगापुर का दौरा किया था।