केरल में मंकीपॉक्स का तीसरा केस मामला सामने आया है। यह शख्स भी पूर्व में मिले संक्रमित की तरह यूएई से लौटा है। देश में अब तक मिले तीनों केस केरल में ही मिल हैं। 35 साल का यह शख्स इस महीने की शुरुआत में संयुक्त अरब अमीरात से केरल आया है। उसके सैंपल की जांच में मंकीपॉक्स की पुष्टि हुई है। केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने बताया कि मलप्पुरम का रहने वाला युवक छह जुलाई को अपने गृह राज्य लौटा था और उसका तिरुवनंतपुरम के मंजेरी मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है। जॉर्ज के मुताबिक, युवक की हालत स्थिर है। उन्होंने बताया कि संक्रमित के संपर्क में रहे लोगों पर करीबी नजर रखी जा रही है।
आज ही केरल के वायनाड जिले के मानन्थावाद्य स्थित दो पशुपालन केंद्रों में 'अफ्रीकन स्वाइन फीवर' के मामले सामने आए हैं। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि भोपाल स्थित राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान में नमूनों की जांच के बाद जिले के दो पशुपालन केंद्र के सूअरों में इस बीमारी की पुष्टि हुई है।
300 सूअरों को मारने के निर्देश
केरल के पशुपालन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि एक केंद्र में कई सूअरों की मौत के बाद नमूने जांच के लिए भेजे गए थे। उनमें इस अफ्रीकी बुखार की पुष्टि हुई है। दूसरे केंद्र में 300 सूअरों को मारने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने कहा कि इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
असम, उत्तराखंड में भी मिला
इस साल जुलाई की शुरुआत में, उत्तराखंड में अफ्रीकी स्वाइन बुखार के मामले सामने आए थे। साल 2020 से अब तक अकेले असम में ही अफ्रीकी स्वाइन बुखार के कारण 40 हजार से अधिक सूअरों की मौत हो चुकी है। वहां के 22 जिलों में यह संक्रमण फैला है।
यह सूअरों से इन्सानों में नहीं फैलता
अफ्रीकी स्वाइन बुखार (एएसएफ) भारत में पहली बार फरवरी 2020 में असम में पाया गया था और यह घरेलू व जंगली दोनों सूअरों को प्रभावित करता है। स्वाइन फ्लू बुखार जानवरों से मनुष्यों में फैल सकता है, लेकिन अफ्रीकी स्वाइन बुखार सूअरों से मनुष्यों में नहीं फैलता है। इस संक्रमण से सूअरों में बुखार, मतली और दस्त के लक्षण दिखाई देते हैं।