'वन नेशन, वन इलेक्शन' बिल पर सोमवार को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने राजनीतिक विशेषज्ञों और शिक्षाविदों के साथ बैठक की। समिति के अध्यक्ष पी.पी. चौधरी ने कहा कि विशेषज्ञों ने इसे देश के विकास के लिए 'बहुत जरूरी' बताया। इसे लेकर पीपी चौधरी ने कहा, 'आज हमने राजनीतिक वैज्ञानिकों को बुलाया, उनकी राय लेना बहुत महत्वपूर्ण है। कई सवाल उठे, जिन पर हमने स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने कहा कि अगर देश को आगे बढ़ाना है, तो वन नेशन, वन इलेक्शन होना जरूरी है। पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति खन्ना भी 19 तारीख को आएंगे और इस पर अपने विचार देंगे।'
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बैठक में विशेषज्ञों ने रखी अपनी राय
इस बैठक में लोकसभा और राज्य विधानसभा के साथ-साथ एक साथ चुनाव कराने की संभावनाओं और चुनौतियों पर चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार, विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार चुनाव होने से भ्रष्टाचार की संभावना बढ़ती है और आचार संहिता लागू होने से सरकारी कामकाज की रफ्तार धीमी पड़ती है।
विशेषज्ञों ने चार बड़े सुधार क्षेत्रों की पहचान की।
1. राजनीतिक दलों से जुड़े सुधार
2. चुनावी प्रचार में सुधार
3. संसदीय और विधायी प्रक्रियाओं में सुधार
4. महिलाओं के प्रतिनिधित्व में वृद्धि
चुनावी घोषणापत्र पर दी जाए 'कार्रवाई रिपोर्ट'
उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी स्थानीय निकाय चुनावों में बेहतर रही है, और गैर-आरक्षित सीटों पर भी बड़ी संख्या में महिलाएं चुनी गई हैं। सुझाव दिया गया कि उम्मीदवारों का रिपोर्ट कार्ड जनता को उपलब्ध कराया जाए, चुनावी घोषणापत्र पर 'कार्रवाई रिपोर्ट' दी जाए और क्षेत्र-विशेष घोषणापत्र जारी करने को बढ़ावा दिया जाए।
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इन क्षेत्रों पर पड़ता है बार-बार चुनाव का असर
इस बैठक में यह भी कहा गया कि बार-बार चुनाव का असर शिक्षा, खासकर स्कूल शिक्षा पर पड़ता है। गौरतलब है कि 'संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024' और 'केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024' पिछले साल दिसंबर में लोकसभा में पेश हुए थे और इन्हें आगे की जांच के लिए संयुक्त समिति को भेजा गया था।