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ये कौन हैं जो खुले में शौच करने पर मारते हैं सीटी?

Tue, 07 Jun 2016 03:04 PM IST
दिव्या आर्य/ बीबीसी संवाददाता
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firozabad - फोटो : BBC
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फर्ज कीजिए आप शौच के लिए सुबह में खेत में जाएं और आपका पड़ोसी आप पर टॉर्च मारकर और पास के बच्चे सीटी बजा कर आपको हैरान कर दे। फिर शौच के लिए आप जो पानी लाएं हों, उस लोटे को हाथ से लेकर पलट दें। और फिर समझाएं कि आपको खेत में नहीं बल्कि आपके घर में बने शौचालय में जाना चाहिए।
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गांववालों को इस नायाब तरीके से रोकने की मुहिम चल रही है।

firozabad - फोटो : BBC
उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के एक गांव में जब मैं सुबह चार बजे पहुंची, तो यही नजारा देखने को मिला। यहां घरों में शौचालय होने के बावजूद शौच के लिए खेतों में जा रहे गांववालों को इस नायाब तरीके से रोकने की मुहिम चल रही है। 

सरकारी मदद से शौचालय बनाने के बावजूद इसे बदलना बहुत मुश्किल रहा है।

firozabad - फोटो : BBC
मैंने जब 15 साल के हरीओम को रोका तो वो झेंप गया। मैंने उनसे पूछा घर का शौचालय छोड़ यहां क्यों आए हो? हरी ने कहा, ''हमें पसंद नहीं है। गर्मी लगती है उल्टी आती है और गैस होने लगती है। ''बच्चे हों या बुजुर्ग गांवों में शौच के लिए खेत जाने की आदत इतनी पुरानी है। कि सरकारी मदद से शौचालय बनाने के बावजूद इसे बदलना बहुत मुश्किल रहा है।

दुनियाभर में एक अरब लोग शौच के लिए खेतों में जाते है

firozabad - फोटो : BBC
दुनियाभर में एक अरब लोग शौच के लिए खेतों में जाते है। इनमें से करीब 60 फीसद लोग भारत में रहते है। सरकार पिछले 30 सालों से टॉयलेट बनाने की स्कीमें चला रही है, लेकिन देशभर में ऐसे हजारों शौचालय बेकार पड़े है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में गांधी जयंती पर ऐलान किया था कि सरकार 2019 तक हर घर में शौचालय बनवा देगी। 

ये शौचालय नालियों (सीवर लाइन) से नहीं जोड़े जाते और पानी का कम इस्तेमाल करते है। मल इनके नीचे बने बड़े गड्ढों में इकट्ठा होकर समय के साथ खाद बन जाता है। लेकिन असली चुनौती इन शौचालयों को इस्तेमाल करवाना है। यही समझते हुए स्वच्छ भारत मिशन के तहत पहली बार शौचालय बनाने की मुहिम का केंद्र समुदाय को बनाया गया।

स्वयंसेवकों को खुले में शौच से सेहत को होने वाले नुकसान बताए जाते है

firozabad - फोटो : BBC
अब नए शौचालय बनाने से पहले स्वयंसेवकों को खुले में शौच से सेहत को होने वाले नुकसान बताए जाते है। इसके बाद वो गांववालों के साथ सभाएं करते हैं और सुबह टॉर्च, सीटियों और थाली पीटते हुए गश्त लगाना शुरू करते है।
 

हरेंद्र पाल सिंह यहां इन स्वयंसेवकों के नेता है।

firozabad - फोटो : BBC
हरेंद्र पाल सिंह यहां इन स्वयंसेवकों के नेता है। वो बताते है कि सेहत से ज्यादा गांववालों को औरतों की इज्जत से जुड़ी दलील समझ में आती है। हरेंद्र कहते है कि''हम उन्हें बताते हैं कि जब अपने घर की औरतों से अपनी इज्जत जोड़ते हो, तो जब वो खेत में जाती है और उन्हें हर अजनबी, गैर आदमी देखता है, तब लाज और शर्म कहां चली जाती है।'' 
 

पूनम कुमारी भी शौचालय बने होने के बावजूद खेतों में जाती है

firozabad - फोटो : BBC
पूनम कुमारी भी शौचालय बने होने के बावजूद खेतों में जाती है। उनके पिता अक्सर बीमार रहते हैं और भाई घर खर्च के लिए बहुत कम पैसे देता है। उन्होंने बारहवीं तक पढ़ाई तो पूरी की है। लेकिन रोजगार के नाम पर खेत में दिहाड़ी मजदूरी करती है। वो बताती हैं, ''खेत में जाने के लिए एक मग पानी चाहिए पर टॉयलेट के लिए एक बाल्टी, और पानी का पंप लगाने के पैसे नहीं है।
इसलिए हम खेत में जाते हैं।''
 

घर में भैंसों के लिए, रसोई के लिए और पीने के लिए पानी भरने औरतें ही जाती है।

firozabad - फोटो : BBC
घर में भैंसों के लिए, रसोई के लिए और पीने के लिए पानी भरने औरतें ही जाती है। हैंडपंप आधे घंटे की दूरी पर है। औरतें अपनी मेहनत कम करने के लिए पंप की मांग करने से हिचकिचाती है। वो कहती है। ''इसलिए सुबह-सुबह वह मां के साथ निकल पड़ती हैं क्योंकि रोशनी होने पर लड़के घूमने लगते है।

इस गांव में बने शौचालय शौच के लिए इस्तेमाल नहीं हो रहे है।

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'हरेंद्र इस मुहिम की अहमियत समझते हैं। वो पढ़े-लिखे है। कॉलेज की पढ़ाई के बाद अब वो सरकारी नौकरी के लिए परीक्षा की तैयारी कर रहे है। पर नया बांस नार्की गांव में शिक्षा का स्तर बहुत कम है। खेती के अलावा यहां के ज्यादातर लोग दिहाड़ी मजदूरी करते है। इस गांव में बने शौचालय शौच के लिए इस्तेमाल नहीं हो रहे हैं, हमें उनमें गोबर के कंडे, कपड़े रसोई का स्टोव और बरतन तक रखे मिले।

भारत में शौच के लिए खेतों की ओर जा रही औरतों के रेप और कत्ल की कई वारदातें हुई है।

firozabad - फोटो : BBC
भारत में शौच के लिए खेतों की ओर जा रही औरतों के रेप और कत्ल की कई वारदातें हुई है। पर इसे देखने-समझने वाले और घर के खर्चों से जुड़े फ़ैसले लेने वाले पुरुष अब भी शौचालय को अहमियत नहीं देते है। फिरोजाबाद में स्वच्छ भारत मिशन चलाने की जिम्मेदारी वहां की जिला मजिस्ट्रेट निधि केसरवानी की है। वो मानती हैं कि गरीब परिवारों में पानी से जुड़ी परेशानियां है।
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''ये एक भेड़चाल जैसा है, मेरा अनुभव है कि लोग एक-दूसरे को देखकर सोचने पर मजबूर हो रहे है।

firozabad - फोटो : BBC
जिला मजिस्ट्रेट निधि केसरवानी कहती हैं कि उनसे निपटने के लिए पानी से जुड़ी सभी योजनाओं और मौजूदा धनराशि को उपयोग में लाने की कवायद चल रही है। ''ये एक भेड़चाल जैसा है, मेरा अनुभव है कि लोग एक-दूसरे को देखकर सोचने पर मजबूर हो रहे है। उनपर दबाव बन रहा है और वो अपने लिए अपनी आदतें बदलने की जरूरत को समझ रहे है।'' मिशन का लक्ष्य महत्वाकांक्षी जरूर है, पर निधि को भरोसा है कि सरकार की ये स्कीम सिर्फ कागज पर नहीं रह जाएगी।
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