सेना भर्ती में अब तक फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे सेंध लगाने की कोशिश के मामले ही सामने आए थे लेकिन इस बार तो दलालों ने सेना का भर्ती तंत्र ही भेद डाला। दिल्ली सेना भर्ती कार्यालय के फर्जी नियुक्ति पत्र के सहारे हरियाणा के चार युवक बरेली स्थित जाट रेजीमेंट सेंटर मुख्यालय में ट्रेनिंग लेने आ गए।
12 दिन तक वे सैनिक बनकर ट्रेनिंग भी लेते रहे लेकिन नियुक्तिपत्र के सत्यापन में मामला खुला तो सेना के होश उड़ गए। सेना ने चारों युवक पुलिस के हवाले कर दिया है। चारों को शुक्रवार को जेल भेजा जाएगा। पकड़े गए युवकों में तीन हरियाणा के पलवल जिले के हैं। ये हैं- होडल तहसील के गांव रामनगर का रवि पुत्र अशोक कुमार, शमशाबाद गांव का मनीष कुमार पुत्र सतीश सिंह, कृणा कॉलोनी का धर्म चंद्र पुत्र जगमाल सिंह। चौथा युवक हरियाणा के बल्लभगढ़ की चावला कॉलोनी का संदीप पुत्र हंसराज है।
इन युवकों ने दलालों को तीन से चार लाख रुपये देकर फर्जी नियुक्तिपत्र हासिल किए थे। दिल्ली के सेना भर्ती कार्यालय के नियुक्तिपत्र लेकर एक जुलाई को 21 युवक जाट सेंटर पहुंचे थे। इनमें ये चारों भी थे। उसी दिन से सैनिक जीडी के रूप में इनकी ट्रेनिंग शुरू करा दी गई थी।
न परीक्षा दी और न ही फिजिकल दिया
सेना भर्ती
चारों ने बताया कि भर्ती के लिए न तो वे दौड़ में शामिल हुए और न ही उनका मेडिकल हुआ। उन्होंने कोई लिखित परीक्षा भी नहीं दी फिर भी कुछ दलालों ने उनसे तीन से चार लाख रुपये वसूले और फर्जी नियुक्तिपत्र दे दिया। इसके आधार पर वे ट्रेनिंग लेने जाट रेजीमेंट सेंटर आ गए। जाट रेजीमेंट सेंटर ने चारों युवकों को कैंट थाना पुलिस के हवाले कर दिया। सेंटर के दंडपाल लेफ्टिनेंट कर्नल समीर कटियार की ओर से दी गई तहरीर पर कैंट थाना पुलिस ने उनके खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा कायम कर लिया है। पुलिस इन्हें जेल भेजने के लिए शुक्रवार को कोर्ट में हाजिर करेगी।
चारों युवकों ने जिस दलाल से सेना भर्ती के फर्जी नियुक्तिपत्र हासिल किए, वह खुद को दिल्ली भर्ती कार्यालय के अफसर का ड्राइवर बताता था। युवकों के मुताबिक, उसका नाम रेशम है और वह उनसे दिल्ली के सदर बाजार में मिलता था। वहीं, उसने पैसे लिए और नियुक्तिपत्र दिए। युवकों ने बताया कि रेशम ने उनको फर्जी नियुक्ति पत्र देकर बोला था, जाओ बरेली चले जाओ, अब तुम्हारी नौकरी पक्की हो गई। ट्रेनिंग लो और सरहद पर तैनात हो जाना। इसके बाद चारो युवक बरेली जाट सेंटर चले आए।
सेना की ओर से कैंट थाना पुलिस के हवाले किए गए चारो युवकों को अब पछतावा है। हालांकि वह पहले ही जानते थे कि सेना में भर्ती के लिए रैली में शामिल होकर दौड़ निकालना, मेडिकल और लिखित परीक्षा में पास होना जरूरी है। उन्हें यह भी अंदेशा था कि उनका नियुक्ति पत्र फर्जी हो सकता है और वह फंस सकते हैं लेकिन रवि ने कहा, रेशम ने जिस तरह से उनको झांसे में लिया, वह आश्वस्त हो गए कि अब सेना में उनकी भर्ती पक्की है।
बनने चले थे सैनिक, बन गए अपराधी
सेना
युवकों ने बताया कि अफसर से बात करके उसने सारी सैटिंग करा दी है। दौड़, मेडिकल और लिखित परीक्षा में भले ही वह शामिल नहीं हुए लेकिन उनके साइन वहां हो गए हैं। कागजों में कोई कमी नहीं है। धर्मचंद्र और रवि आपस में दोस्त हैं। उन्होंने बताया कि पांच मई को गुडगांव के देवीलाल स्टेडियम में सेना की भर्ती रैली थी। वे दोनों उसमें शामिल होने गए थे, लेकिन दौड़ में शामिल नहीं हो पाए, वहीं रेशम उनको मिल गया और बोला- अगर तुम शामिल होना चाहते हो बोले। उन्होंने हामी भर दी और रेशम का नंबर लेकर चले आए।
इसके बाद दिल्ली के सदर बाजार में रेशम से उनकी मुलाकात होने लगी। बकौल रवि उसने रेशम को साढ़े तीन लाख और धर्मचंद्र ने पांच लाख रुपये दिए। इसके बाद रेशम ने उनको नियुक्ति पत्र दिया। चारों युवकों ने बताया कि रेशम ने उन्हें पूरी रकम नियुक्ति के बाद देने को कहा था। तीन युवकों को जब उसने नियुक्ति पत्र दिए, उसके बाद कैश में रकम वसूली, जबकि चौथे युवक रवि ने बाद में पैसा देने की बात कही थी।