कैसे पहचानें प्रदूषण के नुकसान को
डॉक्टरों का मानना हैं कि शरीर का कोई ऐसा अंग नहीं, जो प्रदूषण की चपेट में न हो। सिर के बाल से लेकर पैर के नाखून तक, सब पर प्रदूषण अपना असर छोड़ रहा है। प्रदूषण के जरिए जहरीले तत्व सांस में घुल कर शरीर में पहुंच रहे हैं और अपना असर शरीर के विभिन्न अंगों पर छोड़ रहे हैं। अब सवाल यह उठता है कि पता कैसे चले कि प्रदूषण हमें कैसे नुकसान पहुंचा रहा है? इसका आसान-सा तरीका है। अगर आप नॉर्मल सांस लेते और छोड़ते हैं और अचानक आपको सांस लेने में तकलीफ होने लगे, सांस खींचने में जोर लगाना पड़े तो समझ जाएं कि आप प्रदूषण की गिरफ्त में हैं। अचानक किसी इलाके में या फिर किसी खास वक्त आपकी आंखों से पानी आने लगे या आंख में जलन और खुजली शुरू होने लगे तो समझ जाना चाहिए कि आपकी आंखें प्रदूषण सह नहीं पा रहीं। इसी तरह आप घर से सही-सलामत निकले और अचानक सड़क पर आते ही गले में खिच-खिच या जलन महसूस होने लगे तो इसकी वजह प्रदूषण हो सकता है।
कौन फैला रहा है प्रदूषण
प्रदूषण भी दो तरह का है, एक कुदरती और दूसरा इंसानी यानी जो हम फैला रहे हैं।
कुदरती प्रदूषण
- जंगल में आग लग जाना
- ज्वालामुखी का फटना
- रेगिस्तान में धूल भरी आंधी चलना आदि
इस तरह के प्रदूषण को रोकना मुमकिन नहीं है लेकिन इनका नुकसान भी ज्यादा नहीं है क्योंकि इनमें से ज्यादातर इंसानी बस्ती से दूर होते हैं।
इंसानी प्रदूषण
- पावर प्लांट से निकलने वाला पलूशन
- फैक्टरियों से निकलनेवाली जहरीली गैसें और अवशेष
- गाड़ियां से निकलनेवाला धुआं
- फसल कटाई के बाद खेतों में लगाई जाने वाली आग
- पेंट, हेयर स्प्रे, वार्निश आदि चीजों से फैलने वाला प्रदूषण
गर्भवति महिलाएं ऐसे समय में थोड़ा बचकर रहें। डॉक्टर कुमार का कहना है कि प्रदूषण से पुरुष और महिला, दोनों की सेक्सुअल परफॉर्मेंस और प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है। स्पर्म और एग बनने की क्षमता कम हो जाती है। मिस-कैरिज से लेकर प्री-मैच्योर डिलिवरी और बच्चे का वजन कम होने की आशंका बढ़ जाती है। बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास पर असर पड़ता है।
दिल पर प्रभाव और सांस लेने में परेशानी
प्रदूषण के दौरान सबसे ज्यादा प्रभाव अस्थमा के मरीजों पर पड़ता है। सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। अस्थमा के मरीजों को प्रदूषण के दौरान सांस लेते ही खांसी आने लगती है। सांसों की नली में जलन होती है। कई लोगों को भूख न लगने की भी शिकायत होने लगती है। यही नहीं इस दौरान दिल के मरीजों को हार्ट अटैक के खतरे भी बढ़ जाते हैं। हार्ट से जुड़ी दूसरी समस्याओं की आशंका भी बढ़ जाती है। प्रदूषण से सांस की नली पर बहुत असर होता है। उसमें जलन होने लगती है और सांस लेने में रुकावट महसूस होती है। ऐसे में लोगों को कम से कम बाहर निकलना चाहिए। ऐसे समय निकले जब ट्रैफिक में फंसने के चांसेज कम हो।
मास्क और एयर प्यूरीफायर को लेकर विशेषज्ञों की राय अलग-अलग है। कुछ का मानना है कि मास्क प्रदूषण से बचाव में कुछ हद तक मदद करता है लेकिन कुछ कहते हैं कि इससे बहुत फर्क नहीं पड़ता। अच्छी क्वॉलिटी के N1 मास्क से थोड़ा-बहुत बचाव मुमकिन है लेकिन सस्ते मास्क का कोई फायदा नहीं। एयर प्यूरीफायर को ज्यादातर एक्सपर्ट किसी काम का नहीं समझते।
नीम की पत्तियों को पानी में उबाल कर नहाएं और रात में सोने से पहले इस पानी से चेहरा धोएं तो अच्छा रहता है। नीम की तीन-चार पत्तियां सुबह-सुबह खाएं। ये हमारे खून को साफ करने में मदद करती हैं। घर में तुलसी लगाएं। तुलसी घर के प्रदूषण को कम करती है। हर दिन तुलसी की चार-पांच पत्तियों का सेवन करने से सांस की नली साफ रहती है।
एक चम्मच हल्दी को घी या शहद के साथ सुबह-सुबह खाली पेट खाने से कई बीमारियां दूर रहती हैं। हल्दी में एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं जो हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत करते है और हमें बीमारियों से लड़ने के लिए मजबूत बनाते हैं।
गाय के घी की दो-तीन बूंदें सुबह उठने के बाद और रात में सोने से पहले नाक के दोनों छेदों में डालें तो नाक पर प्रदूषण का बुरा असर कम होता है। रोजाना घर का बना देशी घी 2 चम्मच खाना चाहिए। यह हमारी हड्डियों, किडनी और लिवर में जहरीले तत्वों को जमने नहीं देता। गिलोय का जूस खाली पेट पिएं या फिर इसे आधा चम्मच हल्दी के साथ लेने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और यह बीमारियों से लड़ने में मदद करता है।
नियमित शरीर की मसाज से भी बहुत फायदा होता है। अगर सरसों का तेल या देशी घी गर्म करके मसाज कराते हैं तो यह ब्लड के सर्कुलेशन को बढ़ाता है और प्रदूषण से होने वाली कई बीमारियों से लड़ने में मदद करता है।
योग का प्रभाव
प्राणायम करने और सांस से जुड़ी सभी एक्सरसाइज प्रदूषण से लड़ने में मदद करती है। लेकिन अगर बहुत प्रदूषण हो तो पार्क में किसी भी तरह के व्यायाम करने से बचना चाहिए। अगर घर में जगह न हो तो प्राणायम करने के लिए ऐसे पार्क को चुनें, जहां पेड़-पौधे बहुत हों लेकिन गाड़ियां की आवाजाही कम हो।
अलोम-विलोम, कपालभाति और जल नेति क्रिया शरीर में प्रदूषण के प्रभाव को कम करती है।