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1965, 1971, 1999 युद्ध: पाक फौज के शिकंजे में आए इन 3 पायलटों की दास्तां भी सुनिए...

Fri, 01 Mar 2019 02:00 PM IST
ललित फुलारा न्यूज डेस्क,अमर उजाला
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भारत के तीन पूर्व वायुसेना अधिकारी कम्बम्पति नचिकेता, जे. एल. भार्गव और करियप्पा पाकिस्तान की कैद में रहे चुके हैं।
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देश भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान के 'अभिनंदन' के लिए तैयार है। अभिनंदन को पाक फौज ने उस वक्त पकड़ लिया था जब उनका विमान, पाक लड़ाकू विमान एफ-16 को मार गिराने के बाद पाक अधिकृत कश्मीर में जा गिरा था। अभिनंदन की ही बदौलत भारत में पाकिस्तानी वायुसेना की घुसपैठ नाकाम हुई थी। भारत सरकार के दबाव के बाद गुरुवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने संसद में अभिनंदन को सकुशल भारत को सौंपने घोषणा की थी। अभिनंदन के अलावा भी ऐसे तीन भारतीय वायुसेना अधिकारी हैं जो पाकिस्तान के साथ हुए 1965, 1971 और 1999 के युद्ध के दौरान पाक फौज की हिरासत में रहे और जिन्होंने वहां कारावास में फौज का उत्पीड़न सहा था। आइए जानते हैं ऐसे तीन जांबाज अधिकारियों के बारे में...

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भारतीय वायुसेना के ये तीन पायलट रहे थे पाक हिरासत में...

भारत और पाकिस्तान के साथ अलग-अलग युद्धों के दौरान तीन भारतीय पायलट वहां की फौज की हिरासत में रहे। तीनों को ही अभिनंदन वर्तमान की ही तरह पाकिस्तानी वायुसेना को करारा जवाब देने के दौरान पकड़ लिया गया था। ये तीन भारतीय वायुसेना पायलट कम्बम्पति नचिकेता, जे. एल. भार्गव और करियप्पा हैं। कम्बम्पति नचिकेता भारत और पाकिस्तान के बीच हुए 1999 के करगिल युद्ध के दौरान गिरफ्तार हुए और आठ दिनों तक पाक हिरासत में रहे। वहीं,  पूर्व एयर कमोडोर जे. एल. भार्गव 1971 के युद्ध में एक साल तक पाक सेना की कैद में रहे। 1965 के युद्ध में एयर मार्शल के.सी करियप्पा ने चार महीने पाकिस्तानी फौज की हिरासत में बिताए।

जे. एल. भार्गव से पाक अधिकारी ने कहा था कलमा पढ़ें
जे. एल भार्गव को पाकिस्तानी सेना ने कलमा पढ़ने के लिए कहा और जब वह नहीं पढ़ पाए तो उन्हें जेल भेज दिया गया। भार्गव का विमान 5 दिसंबर 1971 को पाक में गिरा था। उन्होंने पाकिस्तानी फौज के हाथ लगने से पहले बारह घंटे तक अपनी पहचान छिपाए रखी। भार्गव के विमान को जैसे ही पाक ने गिराया उन्होंने बाहर छलांग लगा दी। इस तरह अपनी पहचान छिपाते-छिपाते आखिर में वे पाक फौज के हाथ लग ही गए। इससे पहले तक भार्गव लोगों के सामने खुद को पाक सेना का जवान बताते रहे। उन्हें जब गिरफ्तार किया गया था तो अभिनंदन की तरह ही उनसे भी पूछा गया कि वह कहां से हैं, उन्होंने खुद को रावलपिंडी का बताया। इस पर जब किसी ने उनसे कहा कि वह भारतीय गांव में खड़े हैं तो भार्गव चालाकी समझ गए और खुद को पाकिस्तान भेजने की गुजारिश करने लगे।
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करगिल युद्ध के हीरो नचिकेता ने पाक हिरासत में बिताए 8 दिन
नचिकेता करगिल युद्ध के हीरो हैं। 1999 में भारत-पाक युद्ध के दौरान वे पाकिस्तानी फौज की गिरफ्त में आ गए थे। उन्हें काफी प्रताड़ित किया गया था। नचिकेता करगिल युद्ध के दौरान फ्लाइट लेफ्टिनेंट थे। वह 26 मई 1999 को करगिल युद्ध  के दौरान बटालिक सेक्टर में जाने वाले नंबर 9 स्क्वाड्रन आईएएफ पायलटों में से एक थे।

नचिकेता ने 80 एमएम रोकेट्स के जरिए दुश्मन के ठिकाने पर पहला वार किया और जैसे ही 30 एमएम केनन से दूसरा वार कर रहे थे, विमान के इंजन में आग लग गई और इंजन फेल हो गया। नचिकेता विमान से कूद गए और पाक की धरती पर पहुंच गए। जैसे ही वह पाकिस्तान की धरती पर पहुंचे उन्होंने पहले दो-तीन घंटों तक खुद को पाक फौज की पकड़ में आने से बचाए रखा। इसके बाद गस्त पर आई पाक फौज ने उन्हें पकड़ लिया और आठ दिनों तक रावलपिंडि में अंधेरे कारावास में डाले रखा। यहां उन्हें खूब प्रताड़ित किया गया। उनसे भारत के संबंध में तरह-तरह की जानकारी मांगी गई और मिशन के बारे में उगलवाने की कोशिश भी की गई। 

भारत लौटने पर नचिकेता को मिला वायुसेना पदक
नचिकेता पाकिस्तान में 3 जून 1999 तक युद्ध बंदी रहे। इसके बाद उन्हें यूएन के दबाव के चलते रेड क्रॉस के अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सौंप दिया गया। नचिकेता ने भी अभिनंदन की ही तरह पकड़े जाने से पहले हवा में गोलियां चलाई थीं। भारत लौटने के बाद  नचिकेता को वायुसेना पदक से नवाजा गया।

पाक हिरासत में चार महीने रहे एयर मार्शल करियप्पा
इसी तरह, एयर मार्शल के. सी. करियप्पा का विमान युद्ध के आखिरी दिन पाक अधिकृत कश्मीर में जा गिरा था और वह चार महीने पाक हिरासत में बिताने के बाद सकुशल भारत लौटे। के. सी. करियप्पा जब पाकिस्तानी फौज द्वारा पकड़े गए उनकी उम्र 26 साल थी। उन्होंने भी दूसरे वायुसेना अधिकारियों की ही तरह पाकिस्तानी फौज को सिर्फ अपना नाम, यूनिट नंबर और रैंक बताई। इसके बाद उनको जेल में डाल दिया गया। उन्होंने पाकिस्तानी फौज को यह जानकारी नहीं दी कि उनके पिता फील्ड मार्शल केएम करियप्पा हैं, जो कि आजाद भारत में सशस्त्र बलों के पहले भारतीय प्रमुख थे। करियप्पा को भी नहीं पता था कि उनके साथ क्या होने वाला है लेकिन उनको अपने परिवार की चिंता सता रही थी। इसके बाद पाकिस्तान के जनरल अयूब खान ने रेडियो के जरिए उनके पाक में गिरफ्तारी की घोषणा की और उनके सुरक्षित होने के बारे में जानकारी दी। इतना ही नहीं अयूब खान ने उन्हें जल्द रिहा करने की भी घोषणा की क्योंकि केसी करियप्पा के पिता ब्रिटिश इंडियन आर्मी के दौरान अयूब खान के बॉस थे।

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