देश में बढ़ते साइबर क्राइम से निपटने और इसके जोखिम को कम करने के मकसद से केंद्र सरकार एक मजबूत तंत्र स्थापित करने जा रही है। इसका नाम 'भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र' (14सी) रखा गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसके लिए मंजूरी दे दी है। साइबर क्राइम से जुड़े सभी मामले इसी केंद्र द्वारा हल किए जाएंगे। इस सेंटर में सात एजेंसियां काम करेंगी।
सेंटर की स्थापना से लेकर इसके काम शुरु करने तक इजरायल सभी तरह की तकनीकी मदद देगा। इसमें नेशनल साइबर क्राइम थ्रेट ऐनालेटिक्स यूनिट, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल, साइबर क्राइम इकोसिस्टम मेनेजमेंट यूनिट, नेशनल साइबर क्राइम ट्रेनिंग सेंटर, नेशनल साइबर क्राइम रिसर्च एंड इनोवेशन सेंटर और प्लेटफोर्म फॉर ज्वाइंट साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन टीम शामिल रहेगी।
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी. किशन रेड्डी ने मंगलवार को लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी है। उन्होंने कहा, भारत को बढ़ते साइबर हमलों के खिलाफ अपनी रक्षा करने के लिए खुद को मजबूत करने की जरूरत है। साइबर अपराधों के जोखिम को कम करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक रणनीति तैयार करनी जरूरी थी।
यही वजह रही कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 'भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र' 14सी की स्थापना को मंजूरी दे दी है। केंद्र सरकार ने निगरानी जैसे खतरे के विश्लेषण और साइबर सुरक्षा में अनुसंधान एवं विकास पर खास ध्यान दिया है। गृह मंत्रालय, साइबर अपराध के खिलाफ लड़ाई में एक नोडल बिंदु के रूप में काम करेगा।
भरतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र, कानून प्रवर्तन एजेंसियों की अनुसंधान, उनकी समस्याओं और जरूरतों की पहचान कर उन्हें नई प्रौद्योगिकियों से लैस फोरेंसिक टूल मुहैया कराएगा। इसमें विदेशों के अनुसंधान संस्थानों की मदद भी ली जाएगी। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र, साइबर अपराधों पर अन्य देशों के साथ पारस्परिक कानूनी सहायता-संधियों के कार्यान्वयन से संबंधित सभी तरह की गतिविधियों का समन्वय करेगा।