नए संसद भवन के उद्घाटन को लेकर लगातार सियासी बवाल मचा हुआ है। 28 मई को होने वाले समारोह का जहां कई राजनीतिक दलों ने बहिष्कार किया है। वहीं, कइयों ने शामिल होने की पुष्टि की है। समारोह में शामिल होने वाले राजनीतिक दल तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी), शिरोमणि अकाली दल, बीजू जनता दल (बीजेडी) और युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) है। इन पार्टियों ने बुधवार को एलान किया है कि वह उद्घाटन के समय उपस्थित रहेंगे।
ओडिशा में सत्तारूढ़ बीजू जनता दल ने बुधवार को नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह में शामिल होने का एलान किया। पार्टी ने एक बयान में कहा कि बीजेडी का मानना है कि सांविधानिक संस्थाओं को ऐसे किसी भी विवाद से अलग रखा जाना चाहिए जिससे उनकी प्रतिष्ठा और सम्मान प्रभावित होता हो। ऐसे मुद्दों पर बाद में कभी भी सदन में चर्चा हो सकती है। ऐसे में बीजद इस ऐतिहासिक अवसर पर इसमें भाग लेगा।
वहीं, आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के प्रमुख वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने पुष्टि की कि उनकी पार्टी नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह में शामिल होगी। कार्यक्रम को ऐतिहासिक बताते हुए जगन मोहन ने कहा कि लोकतंत्र की सच्ची भावना के तहत मेरी पार्टी इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में शामिल होगी। उन्होंने भव्य और विशाल संसद भवन राष्ट्र को समर्पित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई भी दी।
सीएम जगन ने सभी राजनीतिक दलों से सभी सियासी मतभेदों को दूर करने की अपील की और कहा कि ऐसे शुभ आयोजन का बहिष्कार करना लोकतंत्र की सच्ची भावना नहीं है। उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का मंदिर होने के नाते देश की आत्मा को दर्शाती है और लोगों तथा सभी राजनीतिक दलों की है। इससे पहले पार्टी के संसदीय दल के नेता विजयसाई रेड्डी ने कहा था कि उनकी पार्टी नए संसद भवनए के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होगी।
वहीं, शिरोमणि अकाली दल ने भी बुधवार को घोषणा की कि वह इस समारोह में शामिल होगा। अकाली दल के नेता दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि हम विपक्षी दलों द्वारा उठाए गए मुद्दों से सहमत नहीं हैं। नए संसद भवन का उद्घाटन देश के लिए गर्व की बात है। इसलिए हमने फैसला किया है कि हमारा दल उद्घाटन समारोह में शामिल होगा।
बता दें, तेलुगु देशम पार्टी यानी टीडीपी 28 मई को दिल्ली में होने वाले नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह में शामिल होगी। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस बात की पुष्टि की है।
गौरतलब है, नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह में राष्ट्रपति को नहीं बुलाने पर सवाल उठ रहे हैं। नेताओं का कहना है कि भवन का उद्घाटन द्रौपदी मुर्मू के हाथों न कराकर पीएम मोदी से कराना राष्ट्रपति का अपमान है। इसलिए ही एक के बाद एक राजनीतिक दल समारोह का बहिष्कार करते जा रहे हैं। लेकिन कुछ राजनीतिक दलों ने साफ कर दिया है कि वह इस बड़े अवसर का हिस्सा बनेंगे।
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आखिर क्यों नए संसद भवन के उद्घाटन को लेकर हो रहा विरोध
दरअसल, 28 मई को दोपहर 12 बजे पीएम मोदी नए संसद भवन का उद्घाटन करेंगे। इस पर कांग्रेस नेताओं और कई अन्य विपक्षी नेताओं का मानना है कि पीएम की बजाय राष्ट्रपति को उद्घाटन करना चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि नए संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति के हाथों ही होना चाहिए। मुर्मू द्वारा नए संसद भवन का उद्घाटन लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक होगा। इस बीच सूत्रों ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ उद्घाटन के अवसर पर बधाई संदेश जारी कर सकते हैं।