केंद्रीय सचिवालय सेवा 'सीएसएस' के अफसरों को पदोन्नति के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। इस पदोन्नति के लिए जरूरी विभागीय परीक्षा छह साल से बंद है। खास बात यह है कि विभागीय परीक्षा यूपीएससी द्वारा संचालित की जाती है। यूपीएससी ने 21 जून 2021 को कार्मिक विभाग से लंबित पड़ी विभागीय परीक्षा आयोजित कराने के लिए अनुरोध किया, लेकिन कार्मिक विभाग ने अब तक इस संबंध में कोई ठोस कार्यवाही नहीं की। जो उम्मीदवार 2012 में एएसओ यानी सहायक सेक्शन अफसर भर्ती हुए थे, वे अब तक सेक्शन अफसर की एडहॉक पदोन्नति तक नहीं पहुंच सके। कार्मिक विभाग की लेटलतीफी के चलते पात्र अधिकारी बिना पदोन्नति के ही रिटायर हो रहे हैं। इस मसले पर सीएसएस अधिकारियों में रोष है।
सीएसएस फोरम के एक पदाधिकारी ने बताया कि इस मामले को लेकर अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल बुधवार (30 जून) को पीएमओ में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष डॉ. जितेंद्र सिंह से मिला था। पदोन्नति से संबंधित यह मामला उनके समक्ष रखा गया। मंत्री ने कहा कि डीओपीटी ने लगातार सभी लंबित मुद्दों को सुलझाने की कोशिश की है। यहां तक कि अदालतों में लंबित मामलों को उचित रूप से संबोधित करने का भी प्रयास किया।
सीएसएस फोरम के पदाधिकारी का कहना है कि डीओपीटी में सीएसएस की कैडर कंट्रोलिंग डिविजन के अव्यवस्थित कैडर व्यवहार के कारण अधिकारियों में काफी असंतोष है। इसी अव्यवस्थित व्यवहार के कारण कार्मिक विभाग भारत के अटॉर्नी जनरल से स्पष्टीकरण मांग रहा है। इसी वजह से पात्र अधिकारियों की पदोन्नति में कई वर्षों की देरी हो रही है। उन्हें न तो एडहॉक और न ही नियमित पदोन्नति मिल पा रही है। ऐसे में कई योग्य अधिकारी बिना पदोन्नति के ही रिटायर हो रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, सीएसएस के करीब 300 अधिकारियों को उम्मीद थी कि उन्हें एक जुलाई से एडहॉक पदोन्नति दे दी जाएगी, लेकिन अब तक वह आदेश भी जारी नहीं हुआ। नियम है कि हर चार साल में विभागीय परीक्षा आयोजित की जाए। पिछली बार विभागीय परीक्षा 2015 में हुई थी। यूपीएससी ने पिछले दिनों इस बाबत डीओपीटी को पत्र भेजकर यह परीक्षा कराने का अनुरोध किया। इस परीक्षा के बाद ही पदोन्नति की राह खुलती है।
यूपीएससी ने लिखा है कि 2015 से 2021 तक के सभी एग्जाम लिए जाएं। सीएसएस में सेक्शन अफसर के करीब 1300 पद खाली पड़े हैं। जब एएसओ को एसओ के पद पर पदोन्नति नहीं मिलेगी तो ये पद खाली नहीं होंगे। ऐसे में नई भर्ती का संकट भी खड़ा हो गया है। केंद्र सरकार के अन्य सभी विभागों में नियमित पदोन्नति की जा रही है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति मामले में आरक्षण के बहाने सीएसएस अधिकारियों को तदर्थ पदोन्नति से भी वंचित किया जा रहा है।
सीएसएस फोरम के एक अन्य सदस्य ने बताया कि 2012 बैच और उसके बाद के सहायक अनुभाग अधिकारी, अनुभाग अधिकारी के ग्रेड में पदोन्नति के लिए पात्र हैं। रिक्तियों के बाद भी सीएसएस के इन अधिकारियो को पदोन्नत नहीं किया जा रहा। अन्य ग्रेड यानी अवर सचिव, उप सचिव और निदेशक पद के लिए, स्पष्ट रिक्तियों और डीपीसी के पूरा होने के बाद भी तदर्थ आधार पर पदोन्नति आदेश जारी नहीं किए गए । दूसरे विभागों जैसे राजभाषा विभाग में नियमित आधार पर प्रमोशन किए जा रहे हैं। डीओपीटी के अंतर्गत आने वाली सीबीआई में सीमित विभागीय परीक्षा आयोजित कर योग्य अधिकारियों को लगातार प्रमोशन दिया जा रहा है। सरकार द्वारा सचिवालय में सभी ग्रेड में प्रमोशन न करने के कारण कर्मचारी चयन आयोग द्वारा निकाली जाने वाली सीधी भर्ती के विज्ञापन पर भी नकारात्मक असर पड़ा।