जम्मू-कश्मीर पुलिस के आईजी विजय कुमार के अनुसार, सुरक्षा बलों की टीमों को जबरदस्त सफलता मिल रही है। आतंकियों को उनके ठिकाने पर जाकर ठोका जा रहा है।
लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हिजबुल मुजाहिदीन और अंसार गजवत-उल हिंद, ये ऐसे आतंकी संगठन हैं, जिन्हें सीधे तौर पर सीमा पार से मदद मिलती है।
केवल जून माह में 39 आतंकियों को मारा जाना, इससे भारतीय सुरक्षा बलों की पहुंच का अंदाजा लगया जा सकता है। घाटी में चल रहे ऑपरेशन से जुड़े सीआरपीएफ के एक अधिकारी बताते हैं कि अभी इन चार तंजीमों के सौ से कम आतंकी बचे हैं।
इस साल के आरंभ में इनकी संख्या दो सौ से अधिक बताई जा रही थी। पाकिस्तानी आईएसआई सबसे ज्यादा ध्यान लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हिजबुल मुजाहिदीन पर दे रही है। वजह, कश्मीर घाटी में जो आतंकी बचे हैं, उनमें से ज्यादातर इन्हीं तीन तंजीमों से जुड़े हुए हैं।
अगर बाकी बची तंजीमों को मिलाकर बात करें, तो इन सभी के पास अब हथियार और गोला बारूद नहीं बचा है। आर्थिक मदद पर भी अंकुश लगा है। सभी तंजीमों के सामने नई भर्ती का संकट खड़ा हो गया है। इनके स्थानीय मददगार भी अब एक-एक कर खत्म हो रहे हैं।
सुरक्षा बलों ने इस साल अल-बदर/एलटी, टीयूएम और आईएस/जेके जैसे छोटे संगठनों के बारे में ठोस खुफिया सूचनाएं जुटा ली हैं। पहले किसी तरह सीमा पार से या स्थानीय स्तर पर इन्हें गोला बारुद मिल जाता था, लेकिन अब वह सप्लाई काफी हद तक बंद हो गई है।
पिछले सप्ताह जम्मू-कश्मीर के कठुआ इलाके में बीएसएफ ने एक पाकिस्तानी ड्रोन को शूट कर दिया था। ड्रोन के साथ अमेरिकी राइफल, दो मैग्जीन, सात हैंड ग्रेनेड और पांच दर्जन कारतूस भी थे।
ये सब हथियार अली भाई नाम के व्यक्ति के पास पहुंचना थे। इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि आतंकियों को अब कश्मीर घाटी में हथियारों और गोला बारुद की बड़ी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
आतंकी तंजीमों को अपने सदस्यों के लिए हथियार और हैंड ग्रेनेड व गोलियां, सीमा पार से मंगानी पड़ रही हैं। सीआरपीएफ अधिकारी के मुताबिक, दिसंबर तक कश्मीर में बड़े पैमाने पर आतंकियों का सफाया तय है।
अब सभी तंजीमों के खिलाफ एक साथ एक्शन होगा। सर्दियों से पहले घाटी में मौजूद ज्यादातर आतंकियों को खत्म कर दिया जाएगा। सुरक्षा बलों के पास यह पुख्ता जानकारी है कि नौशेरा, राजौरी, पुलवामा, शोपियां व अवंतीपोरा में बाकी बचे आतंकी छिपे हुए हैं।
वे अपने ठिकाने पर ही मारे जाएंगे। वजह, उनके पास अब ठिकाना बदलने का वक्त नहीं है। वे जिस ठिकाने पर छिपे हैं, उससे बाहर नहीं जा सकते। अगर वे ऐसा प्रयास करते हैं तो बीच में ही सुरक्षा बलों की गोलियां का निशाना बन जाएंगे।