आज जहां हर बड़ा-छोटा नेता ट्विटर पर मौजूद है वहीं, कुछ नेता ऐसे भी हैं जो ट्वीट-ट्वीट की इस राजनीतिक 'चहचहाहट' से दूर हैं। ऐसे राजनेता जो ट्विटर की नीलिमा में अब तक नहीं रंगे हैं उनमें पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी का नाम शामिल है।
राजनीति में सोशल मीडिया का स्थान बेहद अहम है इससे इंकार नहीं किया जा सकता है। राजनीति को प्रभावित करने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स में यूं तो कई एप और वेबसाइट हैं, लेकिन इसमें ट्विटर सबसे ज्यादा असरदार माना जाता है। एक ओर जहां ट्विटर के माध्यम से राजनेता जनता से सीधे संवाद करते हैं तो दूसरी ओर जनता को भी इसके माध्यम से अपने नेताओं से सवाल पूछने का मौका मिलता है। हालांकि बाग पूरा हरा नहीं है। फेक न्यूज और अफवाहों को बढ़ाने में भी सोशल मीडिया का खास योगदान है। लेकिन, राजनेता बनने के लिए सोशल मीडिया खासकर ट्विटर पर हाजिरी एक अनिवार्य मांग सी बन गई है।
लोकसभा चुनाव 2019 की तिथियां घोषित हो चुकी हैं। इससे पहले ही अब तक सोशल मीडिया से दूर रहीं बसपा सुप्रीमो मायावती का भी ट्विटर पर आधिकारिक एकाउंट बन गया। वहीं, सोशल मीडिया की लाइम लाइट से अब तक दूर रहीं प्रियंका वाड्रा गांधी भी यह समझ गईं कि जनता से संवाद सिर्फ रैलियों में ही नहीं डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी करना होगा।