भारत में आर्थिक अपराध कर विदेश भागे आरोपी मेहुल चोकसी व विजय माल्या
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भारत में अलग-अलग तरीकों से करोड़ों रुपयों का घोटाला करके विदेश में शरण लेने वाले कई ऐसे अपराधी हैं, जो प्रत्यर्पण कानूनों की जटिलताओं का फायदा उठाकर चैन की जिंदगी जी रहे हैं। इन अपराधियों के हौसले कुछ देशों के उदार कानून के चलते बुलंद हैं, जो अपने देश में भारी-भरकम निवेश करने वालों को पनाह दे देते हैं। भारत की कानून व्यवस्था को हाशिए पर रखकर विदेश भागने वाले अपराधियों की एक बड़ी सूची है।
मेहुल चोकसी- मेहुल
चोकसी पर पीएनबी में 11,400 करोड़ रुपयों के घोटाले का आरोप है। साल 2018 में पीएनबी ने मेहुल चोकसी पर करोड़ों रुपयों की धोखाधड़ी का केस दर्ज करवाया था। बैंक ने आरोप लगाया कि चोकसी ने बैंक गारंटी या लेटर ऑफ अंडरटेकिंग का गलत इस्तेमाल किया है। ईडी ने भी चोकसी के खिलाफ एक केस दर्ज किया है। इसके पहले की मेहुल को पकड़ा जाता वह विदेश फरार हो गया था। भगोड़ा कारोबारी मेहुल चोकसी 23 मई की शाम को एंटीगुआ स्थित अपने घर से गायब हो गया था। उसके बाद उसके लापता होने की रिपोर्ट भी दर्ज की गई थी। हालांकि, उसके पहचान के एक शख्स ने दावा किया था कि वो क्यूबा भाग गया है। मेहुल चोकसी एंटीगुआ का नागरिक है और वो पानी के रास्ते भागने की फिराक में था, लेकिन जैसे ही वो डोमिनिका पहुंचा, उसे अधिकारियों ने पकड़ लिया।
नीरव मोदी- मशहूर हीरा कारोबारी नीरव मोदी पर पीएनबी ने 28,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया हुआ है। उसे अगस्त 2018 से इंटरपोल और भारत सरकार द्वारा आपराधिक साजिश, भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग, धोखाधड़ी और अनुबंध के उल्लंघन के मामले में दोषी पाया गया। वह इस समय ब्रिटेन की जेल में कैद है। भारत की प्रत्यर्पण संधि ब्रिटेन के साथ है, लेकिन फिर भी मोदी को वापस देश लाने की राह में कई अड़ंगे सामने आ रहे हैं।
विजय माल्या- किंगफिशर एयरलाइंस का मालिक विजय माल्या को 13 जून 2016 को मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत 9000 करोड़ रुपये के लोन डिफॉल्ट का दोषी पाया गया। वह भारतीय बैंकों से उधार लेकर विदेश फरार हो गया। उसे भारत में भगोड़ा घोषित कर दिया गया है। 17 भारतीय बैंक उससे अपना पैसा वापस लेने के लिए ब्रिटेन के अदालत में केस लड़ रहे हैं। उसके भारत प्रत्र्यापण को लेकर बात चल रही है।
ललित मोदी- पूर्व आईपीएल कमिश्नर ललित मोदी को प्रिवेंशन आफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत केस चल रहा है। ललित मोदी पर आईपीएल के प्रसारण अधिकार मॉरिशस की कंपनी वर्ल्ड स्पोर्ट्स को देने के बदले 125 करोड़ रुपये कमीशन लेने का आरोप है। कंपनी को प्रसारण का अधिकार 425 करोड़ रुपये में दिया गया था। ईडी ने यह मामला 2010 में दर्ज किया था। मोदी पर दो नई टीमों की नीलामी के लिए गलत तरीके अपनाने का भी आरोप है। उसी साल मोदी को आईपीएल कमिश्नर पद से निलंबित कर दिया गया जिसके बाद से वह ब्रिटेन भाग गया।