खाड़ी के चार देशों द्वारा कतर पर प्रतिबंध लगाने और सभी संबंध समाप्त करने का नुकसान भारत को भी उठाना पड़ेगा। खाड़ी देशों के इस झगड़े में भारत के हितों का भी नुकसान होना तय है।
हालांकि अभी कतर पर लगाए गए प्रतिबंधों पर भारत की ओर से कोई बयान जारी नहीं किया गया है माना जा रहा है कि केंद्र सरकार अभी इस मुद्दे पर वेट एंड वाच की स्थिति में है। लेकिन ये तय है कि अगर सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और मिश्र ने लंबे समय तक कतर से अपने संबंध खत्म रखे तो कहीं न कहीं नुकसान भारत को भी उठाना पड़ेगा। चलिए, डालते हैं एक निगाह उन बातों पर जो कतर पर प्रतिबंधों के बीच भारत को भी नुकसान पहुंचा सकती है।
जा सकती हैं भारतीयों की नौकरियां
प्रवासियों के मुल्क कतर में सबसे ज्यादा प्रवासी लोगों की संख्या भारत से गए लोगों की है। कतर पर पाबंदी लगने के बाद साफ है कि उनके हित भी प्रभावित होंगे। कतर में बसे भारतीयों में से काफी लोग ऐसे भी हैं जो कतर में व्यापार करते हैं और वो अन्य खाड़ी मुल्कों सऊदी अरब, यूएई, बहरीन और मिश्र में भी फैला हुआ है। ऐसे में अब उन लोगों के सामने दिक्कतें खड़ी हो सकती हैं।
पड़ेगा भारत के साथ व्यापार पर असर
कतर के साथ भारत की ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में कई संधियां हैं। कतर को निर्यात करने वाला भारत तीसरा सबसे बड़ा देश है। प्रतिबंधों का असर कतर के व्यापार पर भी पड़ सकता है।
गैस सप्लाई पर भी पड़ सकता है असर
खाड़ी का यह मुल्क भारत को बड़ी मात्रा में LNG गैस सप्लाई करता है। एक अनुमान के मुताबिक भारत अपनी जरूरत की 65 फीसदी गैस कतर से ही आयात करता है। इसके अलावा कई भारतीय कंपनियां भी कतर के साथ समय समय पर गैस का अनुबंध करती रही हैं। इसके अलावा भारत कतर से एथलीन, प्रोपलीन, अमोनिया, यूरिया और पोलिथिन का आयाता करता है। इसलिए व्यापार का संतुलन कतर के पक्ष में भारी रहा है। हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार साल 2014-15 में कतर के लिए भारत का निर्यात 1 अरब डॉलर से अधिक था। हालांकि कुछ समय पहले कतर के निर्यात में गिरावट के कारण द्विपक्षीय व्यापार में काफी कमी आई है।
कतर में काम कर रही भारतीय कंपनियों के सामने आ सकती है दिक्कत
भारत से कतर को किए जाने वाले निर्यात में मशीनरी और कल पुर्जे, टांसपोर्ट पुर्जे, स्टील, प्लास्टिक, निर्माण सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक और रबड़ का सामान भेजा जाता है। इसके अलावा भारत की कई बड़ी कंपनियां बड़े पैमाने पर कतर में व्यापार करती हैं, इनमें से कई कंपनियां तो कतर के निर्माण क्षेत्र में भी बड़ी भागीदार हैं। जिनमें लार्सन एंड टर्बो लिमिटेड, शपूरजी पलोनजी ग्रुप, वोल्टाज, सिंप्लेक्स इन्फ्रास्टक्चर, टीसीएस, विप्रो, महिंद्रा टेक, एचसीएल टेक्नोलॉजी आदि प्रमुख हैं। इसके साथ ही सावर्जनिक क्षेत्र के बैंक एसबीआई, आईसीआईसीआई सहित कई बैंकों की बड़ी संख्या में शाखाएं कतर में कार्यरत हैं।
बढ़ सकते हैं तेल के दाम
कतर के विवाद की एक बड़ी समस्या ये भी है कि इसके चलते तेलों के दामों में बढोत्तरी हो सकती है जिसका खामियाजा सीधे सीधे भारतीय बाजार को उठाना पड़ेगा। अगर चार देशों के प्रतिबंध के कारण कतर की वित्तीय स्थितियों पर असर पड़ता है तो इसका खामियाजा वहां काम कर रहे भारतीय कामगरों को भी उठाना पड़ सकता है।