रामलीला मैदान की चर्चा इन दिनों अटल बिहारी वाजपेयी का नाम जोड़े जाने से की जा रही है। भाजपा अपने दिवंगत नेता अटल बिहारी वाजपेयी को सम्मान देने के लिए अब ये जोर लगा रही है लेकिन रामलीला मैदान का नाम बदलने के प्रस्ताव पर विवाद शुरू हो गया है। इसी बीच जानना ये भी जरूरी हो गया है कि आखिर रामलीला मैदान का देश में क्या महत्व है?
इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान से युद्ध की जीत का जश्न इसी मैदान पर मनाया था। ये रामलीला मैदान देश के इतिहास के बदलने का गवाह रहा है।
आजादी की लड़ाई के दौरान महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल और दूसरे नेताओं के लिए विरोध जताने का ये सबसे पसंदीदा मैदान बन गया था।
इसी मैदान पर मोहम्मद अली जिन्ना से जवाहर लाल नेहरू तक और बाबा राम देव से लेकर अन्ना हजारे तक सारे लोग इसी मैदान से क्रांति की शुरुआत करते रहे हैं।
कहा तो ये भी जाता है कि यही वो मैदान है जहां 1945 में हुई एक रैली में भीड़ ने जिन्ना को मौलाना की उपाधि दे दी थी। लेकिन मोहम्मद अली जिन्ना ने मौलाना की इस उपाधि पर भीड़ से नाराजगी जताई और कहा कि वो राजनीतिक नेता है न कि धार्मिक मौलाना।