लोगों की सेहत का ध्यान रखते हुए केंद्र सरकार खाद्य पदार्थों में ट्रांस फैट का उपयोग घटाने की तैयारी कर रही है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने कहा है कि 2022 से खाद्य उत्पादों में ट्रांस वसा या तेल की मात्रा दो फीसदी से ज्यादा नहीं होगी। फिलहाल यह सीमा पांच फीसदी है। इस बाबत जल्द ही उत्पादक कंपनियों को आदेश जारी किए जाएंगे।
एफएसएसएआई के सीईओ अरुण सिंहल ने बुधवार को कहा, खाद्य सुरक्षा यानि सभी को खाना मिलना एक विषय है। जबकि हमारी प्राथमिकता यह है कि लोगों को हमेशा पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्द्धक खाना मिले। लिहाजा हम ट्रांस वसा की मात्रा घटाने के लिए नियमन लेकर आएंगे। खाने में लगातार ज्यादा ट्रांस फैट तमाम बीमारियों का कारण बन सकता है। फिलहाल पांच फीसदी ट्रांस वसा के इस्तेमाल की छूट है। हाल ही में जारी एक अधिसूचना में कहा गया था कि 2021 तक ट्रांस वसा की मात्रा घटाकर 3 फीसदी और 2022 तक 2 फीसदी पर लाने की तैयारी है।
‘ट्रांस वसा मुक्त’ का लोगो अनिवार्य
सिंहल ने सीआईआई के एक कार्यक्रम में कहा, ट्रांस वसा बेहद गंभीर मसला है। उद्योग जगत को इस दिशा में हमारे साथ मिलकर काम करना चाहिए। अभी बेकरी वाले, मिठाई तथा अन्य खाद्य पदार्थ निर्माता उत्पादों पर स्वैच्छिक रूप से ‘ट्रांस वसा मुक्त’ का लोगो लगाते हैं। अब इसे लेकर बाकायदा नियम बनाने की दिशा में बढ़ रहे हैं।
उद्योगों को उठानी होगी जिम्मेदारी
एफएसएसएआई की चेयरपर्सन रीता तेवतिया ने कहा, कोरोना जैसी महामारी के दौर में जन स्वास्थ्य को लेकर उद्योग जगत को जिम्मेदारी निभानी होगी। हम निर्देश बनाकर कारोबारियों की मदद करेंगे, लेकिन जोखिम घटाने के लिए उद्योगों को इसे स्वीकारना होगा। गौरतलब है कि अन्य देशों की तरह भारत में भी उत्पादन, प्रसंस्करण, वितरण और खुदरा बिक्री के स्तर पर नियमन की तैयारी चल रही है।
तमाम बीमारियों का खतरा
ट्रांस वसा का सेवन मुख्य तौर पर हृदय के लिए घातक होता है। यह आपकी धमनियों में अच्छे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा घटाता है और बुरे कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ाता है। मोटापे का कारण बनता है। कुछ प्रकार के कैंसर और टाइप-2 मधुमेह का खतरा बढ़ता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक एक पुरुष के लिए रोज 95 ग्राम, महिला के लिए 70 ग्राम और 5-10 साल के बच्चों के लिए 70 ग्राम वसा का सेवन पर्याप्त होता है।
तले-भुने में खाने में ज्यादा
तली-भुनी चीजों, डोनट, कुकीज और प्रसंस्करित खाद्य पदार्थों में इसकी अधिकता होती है। व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल हाने वाले बेक्ड खाद्य पदार्थों और वनस्पति तेल में इसकी मात्रा ज्यादा होती है।