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पहल: नई तकनीक वाले मेडिकल डिवाइस की मंजूरी में नहीं होगी देरी, सीडीएससीओ ने नया मॉड्यूल शुरू किया

Mon, 08 Dec 2025 06:30 AM IST
लव गौर परीक्षित निर्भय, अमर उजाला

सार

इसमें सर्जिकल उपकरण, मॉनिटरिंग डिवाइस, इमेजिंग मशीनें, डिजिटल व स्मार्ट मेडिकल डिवाइस और अस्पतालों में उपयोग होने वाले विभिन्न उपकरण शामिल है। नए नियमों के अनुसार, कंपनियों को सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों की जानकारी पोर्टल पर दर्ज करनी होगी।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobestock
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विस्तार
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भारत में चिकित्सा उपकरणों की मंजूरी प्रक्रिया को आसान और समयबद्ध बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने मेडिकल डिवाइसेज की जोखिम श्रेणी तय करने के लिए एक नया ऑनलाइन मॉड्यूल शुरू कर दिया। इससे नई तकनीक वाले उपकरणों को वर्गीकृत करने और बाजार में लाने की प्रक्रिया पहले की तुलना में काफी तेज और पारदर्शी हो जाएगी।
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सीडीएससीओ के आधिकारिक सर्कुलर के अनुसार, यह नया मॉडल बीते 27 नवंबर से पोर्टल पर सक्रिय कर दिया गया है। इसके जरिए ऐसे डिवाइस जिनका नाम सीडीएससीओ की मौजूदा जोखिम क्लासिफिकेशन सूची में शामिल नहीं है उनके निर्माता अब सीधे ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे और अपने उपकरण का रिस्क स्तर तय करा सकेंगे। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी ने राज्यों को जारी सर्कुलर में कहा है कि नया मॉड्यूल चिकित्सा उपकरण अधिनियम 2017 के तहत जोखिम वर्गीकरण की प्रक्रिया को सरल, डिजिटल और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से तैयार किया है।

राज्यों के नियामक संगठनों को इसे तत्काल लागू करने के निर्देश दिए गए। सीडीएससीओ के मुताबिक, नया मॉडल इन-विट्रो डायग्नोस्टिक (आईवीडी) उपकरणों को छोड़कर सभी चिकित्सा उपकरण पर लागू होगा।
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इसलिए जरूरी है नया सिस्टम
चिकित्सा उपकरण उद्योग लंबे समय से मांग कर रहा है कि नई तकनीक और नए प्रकार के उपकरणों के लिए जोखिम वर्गीकरण की प्रक्रिया सरल और तेज की जाए। पहले यदि कोई उपकरण सूची में शामिल नहीं होता था तो निर्माता को अलग से आवेदन कर विस्तृत पत्राचार करना पड़ता था जिससे मंजूरी प्रक्रिया में महीनों लग जाते थे। अब नए मॉड्यूल से यह बाधा समाप्त हो गई है और सभी प्रकार के मेडिकल डिवाइस छोटे उपकरणों से लेकर हाई-एंड मशीनों तक का रिस्क क्लासिफिकेशन एक ही मंच पर हो सकेगा।

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कंपनियों को यह मिलेगा फायदा
सीडीएससीओ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नई व्यवस्था से मेडिकल डिवाइस उद्योग को कई लाभ मिलेंगे। उदाहरण के तौर पर आवेदन के बाद निर्णय पहले की तुलना में जल्दी होगा। जोखिम श्रेणी तय करने में अब अलग से पत्राचार की जरूरत नहीं पड़ेगी। साथ ही सभी फाइलिंग और अपडेट ऑनलाइन उपलब्ध रहेंगे। इसके साथ साथ नई तकनीक वाले डिवाइस के लिए रास्ता साफ होगा। अब पूरे देश में एक समान नियमों के आधार पर उप करणों का मूल्यांकन होगा।
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