मोदी सरकार अगले साल से चिकन और मीट को लेकर नामचीन कंपनियों के बड़े खेल पर लगाम कसने पर विचार कर रही है। गोश्त की मात्रा बढ़ाने के लिए एंटी बॉयोटिक दवाओं के इस्तेमाल को नियंत्रित करने की तैयारी की जा रही है। एक निश्चित सीमा से अधिक दवाओं का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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इसके लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक योजना तैयार कर ली है। छह दिसंबर तक इस पर स्वास्थ्य के क्षेत्र से जुड़े विशिष्ट लोगों के साथ-साथ आम लोगों से भी राय मांगी गई है। इसी महीने 7 नवंबर को एक बैठक में मंत्रालय के उच्च अधिकारियों ने चिकन और मीट में बढ़ रहे एंटी बॉयोटिक दवाओं के इस्तेमाल पर रोक लगाने का मुद्दा उठाया था।
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जिसके बाद चिकन और मीट को खाद्य संरक्षा और मानक अधिनियम के दायरे में लाया गया। साथ ही एक ड्रॉफ्ट तैयार कर इस पर सलाह मांगी गई है।