देहरादून में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की मौत के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोमवार को पूर्वोत्तर के लोगों की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के लोगों के लिए सुरक्षा होनी चाहिए।
घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए रिजिजू ने कहा कि उत्तराखंड सरकार ने मामले में तेजी से कार्रवाई की है और अब तक करीब पांच लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है।
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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पहले इस तरह की घटनाएं ज्यादा होती थीं, खासकर दिल्ली में। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यभार संभालने के समय 20 से 40 घटनाएं आम थीं, लेकिन दिल्ली में विशेष इकाई बनाए जाने के बाद ऐसी घटनाओं में कमी आई है।
रिजिजू ने नस्लवाद को एक 'वैचारिक बीमारी' बताया और कहा कि ऐसी सोच कुछ ही लोगों में होती है, जिसे जागरूकता के जरिये दूर करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस तरह की मानसिकता केवल कुछ लोगों में होती है और इसके खिलाफ जागरूकता जरूरी है।
उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में नस्लवाद और भेदभाव के लिए कोई जगह नहीं है। किसी भी जाति, नस्ल या धर्म के लोगों का मजाक नहीं उड़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल पूर्वोत्तर के लोग ही नहीं, बल्कि सभी को इस तरह की घटनाओं से दुखी होना चाहिए, क्योंकि यह किसी के साथ भी हो सकता है।
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केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि इतिहास में लोगों को भारत के भीतर और बाहर दोनों जगह नस्लवाद का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि आज भी विदेश में श्वेत रंग के नहीं होने पर लोगों को निशाना बनाया जाता है। लेकिन यह देश के भीतर नहीं होना चाहिए, क्योंकि भारत विविधताओं से भरा देश है।
उत्तराखंड पुलिस के अनुसार, एमबीए के छात्र एंजेल चकमा पर नौ दिसंबर को देहरादून में कुछ लोगों ने चाकू और अन्य हथियारों से हमला किया था। इलाज के दौरान अस्पताल में उनकी मौत हो गई। इस मामले में अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से दो नाबालिग हैं और उन्हें सुधार गृह भेजा गया है। पुलिस फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है, जिस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। उत्तराखंड मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, फरार आरोपी की तलाश में एक पुलिस टीम नेपाल भी भेजी गई है।